देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का 26 दिसंबर की रात निधन हो गया। वे 92 साल के थे। पूर्व पीएम लंबे समय से बीमार थे। घर पर बेहोश होने के बाद उन्हें रात 8:06 बजे दिल्ली AIIMS लाया गया था। अस्पताल के बुलेटिन के मुताबिक, उन्हें इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया था। जहां रात 9:51 बजे उन्होंने आखिरी सांस ली। अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। डॉ. सिंह साल 2004 में देश के 14वें प्रधानमंत्री बने थे। उन्होंने मई 2014 तक इस पद पर रहे। डॉ. सिंह दो बार देश के प्रधानमंत्री रहे।
डॉ. मनमोहन सिंह के निधन के चलते केंद्र सरकार ने 7 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। सुबह 11 बजे कैबिनेट मीटिंग बुलाई गई है। साथ ही शुक्रवार को होने वाले सभी कार्यक्रम कैंसिल कर दिए गए हैं। इस बीच, कर्नाटक के बेलगावी में चल रही कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) मीटिंग रद्द कर दी गई। कांग्रेस स्थापना दिवस से जुड़े आयोजन भी कैंसिल कर दिए गए हैं। पार्टी के इवेंट 3 जनवरी के बाद शुरू होंगे।
देश के पूर्व प्रधानमंत्रियों का अंतिम संस्कार दिल्ली के विशेष स्मारकीय स्थलों पर किया जाता है। जैसे जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का अंतिम संस्कार राजघाट परिसर में किया गया था। वहीं, कई पूर्व प्रधानमंत्रियों के लिए अलग से समाधि स्थल भी बनाया जाता है। हालांकि अंतिम संस्कार का तरीका दिवंगत व्यक्ति और उनके परिजनों के धार्मिक विश्वासों के अनुसार होता है। उनके अंतिम संस्कार में देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, कैबिनेट मंत्री समेत अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद होते हैं। कहा जा रहा है कि उनका अंतिम संस्कार कल (28 दिसंबर 2024) को राजकीय सम्मान के साथ सुबह 10 बजे होगा।
पूर्व PM के अंतिम संस्कार में क्या प्रोटोकॉल होता है?
भारत में पूर्व प्रधानमंत्री के अंतिम संस्कार के दौरान राजकीय प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है। इसका मकसद देश के प्रति उनके योगदान और पद की गरिमा को सम्मानित करना होता है। अंतिम संस्कार से पहले पूर्व प्रधानमंत्री के पार्थिव शरीर को भारत के राष्ट्रीय ध्वज यानी तिरंगे में लपेटा जाता है। इसके अलावा अंतिम संस्कार के दौरान उन्हें 21 तोपों की सलामी भी दी जाती है। यह सलामी राजकीय सम्मान के हाईएस्ट लेवल का प्रतीक मानी जाती है।
पूर्व प्रधानमंत्री की अंतिम यात्रा के दौरान सुरक्षा और प्रोटोकॉल का पालन काफी सख्ती से किया जाता है। उनकी अंतिम यात्रा में आम जनता से लेकर गणमान्य व्यक्ति और राजनेता शामिल होते हैं। इसके अलावा अंतिम यात्रा में सैन्य बैंड और सशस्त्र बलों के जवान भी शामिल होते हैं और पारंपरिक मार्च करते हैं।