सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ दायर याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि मामला बहुत पुराना है। उन पर राज्य में करोड़ों रुपए के सार्वजनिक धन से अपनी और अपनी पार्टी के प्रतीक हाथियों की आदमकद मूर्तियां बनवाने का आरोप लगाया गया था। यह निर्णय उस दिन आया है, जब मायावती अपना 69वां जन्मदिन मना रही हैं।
शीर्ष अदालत 2009 में दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मायावती, उनके गुरु कांशीराम और हाथियों (उनकी पार्टी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का प्रतीक) की बहुत सारी मूर्तियों के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। ये मूर्तियां टैक्सपेयर्स के पैसे से लखनऊ और नोएडा के पार्कों में बनाई गई थीं, जब मायावती 2007 से 2012 के बीच मुख्यमंत्री थीं।
52.20 करोड़ रुपए की लागत से 60 हाथियों की मूर्तियां
ब्रॉन्ज, सीमेंट और संगमरमर से बनी इन मूर्तियों को लेकर आलोचकों ने उन पर आत्ममुग्धता और अहंकार बढ़ने का आरोप लगाया था।
याचिका में दावा किया गया है कि 52.20 करोड़ रुपए की लागत से 60 हाथियों की मूर्तियां स्थापित करना जनता के पैसे की बर्बादी है और यह चुनाव आयोग के जारी निर्देशों के खिलाफ है।
इसमें यह भी दावा किया गया कि इन आदमकद मूर्तियों को बना कर जनता के पैसों को व्यक्तिगत महिमामंडन के लिए खर्च किया जा रहा है।
उस समय मायावती ने दावा किया था कि स्मारकों में हाथी की मूर्तियां "केवल वास्तुशिल्प डिजाइन" हैं और उनकी पार्टी के प्रतीक का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं। उन्होंने कहा कि मूर्तियों के लिए उचित बजटीय आवंटन किया गया था।
चार बार मुख्यमंत्री रह चुकीं मायावती ने कहा था कि स्मारकों का निर्माण इसलिए किया गया है, ताकि लोग उनसे प्रेरणा लें और यह "लोगों की इच्छा" का प्रतिनिधित्व करता है।