Parliament Monsoon Session: मणिपुर के एक गांव में दो जनजातीय महिलाओं को निर्वस्त्र कर परेड कराने और भीड़ द्वारा उनसे छेड़छाड़ करने संबंधी 4 मई के वीडियो (Manipur horror Video) को लेकर संसद के दोनों सदनों में गुरुवार को जमकर हंगामा हुआ। मणिपुर के वायरल वीडियो पर भारी हंगामे के बाद लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। ब्रेक के बाद दोपहर 12 बजे जैसे ही राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई मणिपुर मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा शुरू हो गया। विपक्ष ने कामकाज स्थगित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की, जबकि सभापति ने इस मामले पर अल्पकालिक चर्चा पर जोर दिया।
राज्यसभा में मणिपुर वीडियो पर तुंरत चर्चा की मांग को लेकर जबरदस्त हंगामा हुआ। कांग्रेस और TMC सांसदों ने नियम 267 का हवाला देते हुए तुरंत मणिपुर हिंसा पर बहस कराने की मांग की। इसपर सभापति ओपी धनखड़ ने नियम और प्रक्रिया का हवाला देने लगे। इसे सुन TMC सांसद ब्रायन भड़क गए और चिल्लाते हुए कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी को मणिपुर वीडियो पर बोलना ही होगा। वह अब चुप नहीं रह सकते हैं। इस बीच, मणिपुर की स्थिति को लेकर महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने सीएम एन बीरेन सिंह के इस्तीफे की मांग की।
राज्यसभा में सदन के नेता पीयूष गोयल ने कहा, "आज सदन की कार्रवाई और व्यापार सलाहकार समिति की बैठक में विपक्ष का रवैया देखकर ये स्पष्ट हो जाता है कि वो मन बनाकर आए थे कि सदन की कार्रवाई नहीं चलने देंगे। शायद उनको परेशानी है कि पश्चिम बंगाल में जिस प्रकार से हिंसा की घटनाएं हुई हैं और छत्तीसगढ़ एवं राजस्थान में नारी शक्ति का बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियां हैं ऐसे में सरकार ने जब स्पष्ट कर दिया कि हम मणिपुर की घटनाओं पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं उसके बावजूद कांग्रेस और बाकि विपक्षी दल सदन की कार्रवाई को रोका.. ये स्पष्ट करता है कि विपक्ष सदन की कार्रवाई को चलने नहीं देना चाहती है।"
पीएम मोदी ने तोड़ी चुप्पी
पीएम मोदी ने मणिपुर के शर्मनाक वीडियो पर संसद के बाहर पत्रकारों से कहा कि मैं इस लोकतंत्र के मंदिर के पास खड़ा हूं तब मेरा ह्रदय पीड़ा से भरा हुआ है, क्रोध से भरा हुआ है। मणिपुर की जो घटना सामने आई है वह किसी भी सभ्य समाज को शर्मसार करने वाली है। पाप करने वाले, गुनाह करने वाले कितने हैं, और कौन-कौन हैं, वह अपनी जगह पर है। लेकिन बेइज्जती पूरे देश की हो रही है। 140 करोड़ देशवासियों को शर्मसार होना पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने सभी मुख्यमंत्रियों से अपने-अपने राज्यों में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने और खासकर महिलाओं की सुरक्षा के लिए कठोर से कठोर कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि घटना चाहे राजस्थान की ही, घटना चाहे छत्तीसगढ़ की हो, चाहे मणिपुर की हो। इस देश में हिंदुस्तान के किसी भी कोने में किसी भी राज्य सरकार को राजनीतिक वाद-विवाद से ऊपर उठकर कानून व्यवस्था को महत्व देना चाहिए और नारी के सम्मान की रक्षा करनी चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि मैं देशवासियों को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। कानून पूरी सख्ती से एक के बाद एक कदम उठाएगा।
दरअसल, मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर परेड कराने की कथित घटना का वीडियो बुधवार को सामने आने के बाद राज्य के पहाड़ी क्षेत्र में तनाव व्याप्त हो गया। 4 मई के इस वीडियो में दिख रहा है कि कुछ व्यक्ति कुकी समुदाय की दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर परेड करा रहे हैं। इंडिजीनियस ट्राइबल लीडर्स फोरम (ITLF) के एक प्रवक्ता के मुताबिक, घृणित घटना 4 मई को कांगपोकपी जिले में हुई है। वीडियो में दिख रहा है कि पुरुष असहाय महिलाओं के साथ लगातार छेड़छाड़ कर रहे हैं और वे (महिलाएं) रो रही हैं तथा उनसे मिन्नतें कर रही हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि उन्होंने मणिपुर में कुछ पुरुषों द्वारा दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर परेड कराने के वीडियो को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह से बात की है और उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने इस घटना को निंदनीय और पूरी तरह अमानवीय बताया है।
बता दें कि मणिपुर में करीब दो माह से जातीय हिंसा हो रही है। इस मुद्दे पर पहली बार प्रधानमंत्री ने कुछ बोला है। मणिपुर में अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में तीन मई को पर्वतीय जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' के आयोजन के बाद झड़पें शुरू हुई थीं। राज्य में तब से अब तक कम से कम 160 लोगों की जान जा चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट 28 जुलाई को सुनवाई करेगा
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर उनकी परेड कराने के वीडियो से वह बहुत व्यथित है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने इसे पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। पीठ ने केंद्र तथा राज्य सरकार से फौरन कदम उठाने और उसे यह बताने का निर्देश दिया कि क्या कार्रवाई की गई है। पीठ ने कहा कि हम सरकार को कार्रवाई के लिए थोड़ा समय देंगे और अगर जमीनी स्तर पर कुछ नहीं होता है तो फिर हम कार्रवाई करेंगे। सुप्रीम कोर्ट अब 28 जुलाई को मामले पर सुनवाई करेगा।