'ऐसे आप हिंदुओं के नेता नहीं बन सकते': RSS प्रमुख मोहन भागवत ने मंदिर-मस्जिद के नए विवाद पर जताई नाराजगी

Temple-Mosque Disputes Row: RSS प्रमुख मोहन भागवत ने देश में जगह-जगह मंदिर-मस्जिद के नाम पर अयोध्या के राम मंदिर जैसे विवाद खड़े करने के लिए हिंदू नेताओं की आलोचना की है। भागवत इस तरह की चेतावनी और सलाह पहले भी दे चुके हैं। लेकिन हाल में संभल, अलीगढ़ और अजमेर शरीफ समेत तमाम जगहों पर मस्जिदों के नीचे मंदिर खोजने की सुनियोजित कोशिशों में तेजी दिखाई दे रही है

अपडेटेड Dec 20, 2024 पर 12:14 PM
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Temple-Mosque Disputes Row: मोहन भागवत ने कहा कि कुछ लोगों को ऐसा लग रहा है कि वे ऐसे मुद्दों को उठाकर हिंदुओं के नेता बन सकते हैं

Temple-Mosque Disputes in UP: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने देश भर में विभिन्न स्थानों पर "राम मंदिर जैसे" विवाद को भड़काने के लिए महत्वाकांक्षी हिंदू नेताओं की आलोचना की है। मोहन भागवत ने कई मंदिर-मस्जिद विवादों के फिर से उठने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद कुछ लोगों को ऐसा लग रहा है कि वे ऐसे मुद्दों को उठाकर हिंदुओं के नेता बन सकते हैं। भागवत ने सहजीवन व्याख्यानमाला में 'भारत-विश्वगुरु' विषय पर संबोधन के दौरान यह बयान दिया। इसमें उन्होंने समावेशी समाज की वकालत की और कहा कि दुनिया को यह दिखाने की जरूरत है कि देश सद्भावना के साथ एक साथ रह सकता है।

भारतीय समाज की बहुलता को रेखांकित करते हुए भागवत ने कहा कि रामकृष्ण मिशन में क्रिसमस मनाया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि "केवल हम ही ऐसा कर सकते हैं क्योंकि हम हिंदू हैं।" उन्होंने कहा, "हम लंबे समय से सद्भावना से रह रहे हैं। अगर हम दुनिया को यह सद्भावना प्रदान करना चाहते हैं, तो हमें इसका एक मॉडल बनाने की जरूरत है। राम मंदिर के निर्माण के बाद, कुछ लोगों को लगता है कि वे नयी जगहों पर इसी तरह के मुद्दों को उठाकर हिंदुओं के नेता बन सकते हैं। यह स्वीकार्य नहीं है।"

'हम एक साथ रह सकते हैं'


भागवत ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण इसलिए किया गया क्योंकि यह सभी हिंदुओं की आस्था का विषय था। उन्होंने किसी विशेष स्थल का उल्लेख किए बिना कहा, "हर दिन एक नया मामला (विवाद) उठाया जा रहा है। इसकी अनुमति कैसे दी जा सकती है? यह जारी नहीं रह सकता। भारत को यह दिखाने की जरूरत है कि हम एक साथ रह सकते हैं।" हाल के दिनों में मंदिरों का पता लगाने के लिए मस्जिदों के सर्वेक्षण की कई मांगें अदालतों तक पहुंची हैं। हालांकि भागवत ने अपने व्याख्यान में किसी का नाम नहीं लिया।

RSS प्रमुख ने कहा कि बाहर से आए कुछ समूह अपने साथ कट्टरता लेकर आए और वे चाहते हैं कि उनका पुराना शासन वापस आ जाए। उन्होंने कहा, "लेकिन अब देश संविधान के अनुसार चलता है। इस व्यवस्था में लोग अपने प्रतिनिधि चुनते हैं, जो सरकार चलाते हैं। आधिपत्य के दिन चले गए।" उन्होंने कहा कि मुगल बादशाह औरंगजेब का शासन भी इसी तरह की कट्टरता के लिए जाना जाता था। हालांकि उसके वंशज बहादुर शाह जफर ने 1857 में गोहत्या पर प्रतिबंध लगा दिया था।

उन्होंने कहा, "यह तय हुआ था कि अयोध्या में राम मंदिर हिंदुओं को दिया जाना चाहिए, लेकिन अंग्रेजों को इसकी भनक लग गई और उन्होंने दोनों समुदायों के बीच दरार पैदा कर दी। तब से, अलगाववाद की भावना अस्तित्व में आई। परिणामस्वरूप, पाकिस्तान अस्तित्व में आया।"

"वर्चस्व की भाषा का इस्तेमाल न हो"

भागवत ने कहा कि अगर सभी खुद को भारतीय मानते हैं तो "वर्चस्व की भाषा" का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है। आरएसएस प्रमुख ने कहा, "कौन अल्पसंख्यक है और कौन बहुसंख्यक? यहां सभी समान हैं। इस देश की परंपरा है कि सभी अपनी-अपनी पूजा पद्धति का पालन कर सकते हैं। आवश्यकता केवल सद्भावना से रहने और नियमों एवं कानूनों का पालन करने की है।"

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भारतीय समाज की बहुलता पर प्रकाश डालते हुए RSS प्रमुख ने कहा कि रामकृष्ण मिशन में क्रिसमस मनाया जाता है। केवल हम ही ऐसा कर सकते हैं, क्योंकि हम हिंदू हैं। उन्होंने कहा कि हम लंबे समय से सद्भावना के साथ रह रहे हैं। अगर हम दुनिया को यह सद्भावना देना चाहते हैं, तो हमें इसका एक मॉडल बनाने की जरूरत है। राम मंदिर का निर्माण इसलिए किया गया क्योंकि यह सभी हिंदुओं की आस्था का मामला था।

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