'देश में धर्म के नाम पर संघर्ष पैदा कर रहे हैं कुछ तत्व', अंतरधार्मिक सम्मेलन में बोले NSA अजीत डोभाल, PFI पर बैन की उठी मांग

सूफी मौलवी हज़रत सैयद नसरुद्दीन चिश्ती ने PFI समेत दूसरे कट्टरपंथी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया। सर्वसम्मत प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि चर्चा या बहस में देवी-देवताओं और पैगम्बरों को निशाना बनाने वालों की 'निंदा' की जाए

अपडेटेड Jul 30, 2022 पर 9:08 PM
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अंतरधार्मिक सम्मेलन में शामिल हुए NSA अजीत डोभाल

एक अंतरधार्मिक सम्मेलन (Interfaith conference) में गुरुवार को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और "राष्ट्र विरोधी गतिविधियों और कलह पैदा करने" में शामिल किसी भी दूसरे समूह जैसे संगठनों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। इस सम्मेलन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल (Ajit Doval) भी शामिल हुए। डोभाल ने चेतावनी दी कि भारत में असामाजिक तत्व धर्म और विचारधारा के नाम पर संघर्ष पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

जबकि सूफी मौलवी हज़रत सैयद नसरुद्दीन चिश्ती ने PFI समेत दूसरे कट्टरपंथी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया। सर्वसम्मत प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि चर्चा या बहस में देवी-देवताओं और पैगम्बरों को निशाना बनाने वालों की 'निंदा' की जाए। उनसे 'कानून के अनुसार निपटा जाना चाहिए।'

दिल्ली में अखिल भारतीय सूफी सज्जादनाशिन परिषद (AISSC) की तरफ से 'सांप्रदायिक सद्भाव' के लिए 'अंतरधार्मिक सम्मेलन' आयोजित किया गया था।


डोभाल ने कहा, "कुछ तत्व ऐसा माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो भारत की प्रगति को रोक रहा है। वे धर्म और विचारधारा के नाम पर कटुता और संघर्ष पैदा कर रहे हैं। यह पूरे देश को प्रभावित कर रहा है और देश के बाहर भी फैल रहा है।"

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सम्मेलन में शांति और एकता पर चर्चा करने के लिए धार्मिक प्रमुखों ने भाग लिया और बाद में PFI जैसे संगठनों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पारित किया।

डोभाल की मौजूदगी में सर्वसम्मति से लाए गए इस प्रस्ताव में कहा गया है, "राष्ट्र विरोधी गतिविधियों और नागरिकों के बीच कलह पैदा करने वाले संगठनों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए और देश के कानून के अनुसार उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए।"

PFI पर बैन के लिए प्रस्ताव

प्रस्ताव में यह भी कहा गया है, "उसी समय, हम दृढ़ता से मानते हैं कि किसी भी व्यक्ति या संगठन को किसी के भी जरिए समुदायों के बीच नफरत फैलाने के सबूत के साथ दोषी पाया जाना चाहिए। कानून के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।"

प्रस्ताव में यह भी जिक्र किया गया है कि धार्मिक प्रतीकों को लक्षित करने वालों को कानून का सामना करना होगा। इसमें कहा गया है, "किसी के द्वारा चर्चा/बहस में किसी भी देवी/देवताओं/भविष्यद्वक्ताओं को निशाना बनाने की निंदा की जानी चाहिए और कानून के अनुसार इससे निपटा जाना चाहिए।"

क्यो बोले अजीत डोभाल?

डोभाल ने कहा कि जब निहित स्वार्थों वाले कुछ लोगों ने भारतीयों को आस्था और धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश की तो पूरा देश प्रभावित हुआ।

उन्होंने कहा, "हमारा देश आज तरक्की कर रहा है। निहित स्वार्थ वाले कुछ लोग देश को बांटने की कोशिश करते हैं। हम सभी को सद्भाव और शांति के लिए मिलकर काम करना होगा और देश को एकजुट रखने के लिए एक समान भावना रखनी चाहिए।"

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि दुनिया भर में बड़े पैमाने पर संघर्ष का माहौल है और भारत की प्रगति से सभी धर्मों के लोगों को लाभ होगा, लेकिन केवल तभी जब असामाजिक तत्वों की तरफ से बांटने की कोशिशों के बावजूद, लोग एकजुट रहें। डोभाल ने कहा, "हम एक साथ चलेंगे और हम एक साथ डूबेंगे।"

वहीं चिश्ती ने कहा कि PFI समेत चरमपंथी और कट्टरपंथी संगठनों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। AISSC के अध्यक्ष चिश्ती ने कहा कि कट्टरपंथी संगठनों पर लगाम लगाना और उन पर प्रतिबंध लगाना समय की जरूरत है, चाहे वह कोई भी हो।

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