UP में बदल सकते हैं CM और डिप्टी CM? सरकार Vs संगठन! योगी की मीटिंग में नहीं पहुंचे मौर्य और पाठक, मंत्रियों की टीम में भी जगह नहीं

बैठक खत्म होने के बाद स्वतंत्र देव सिंह ने मीडिया से बाहर आकर बातचीत की। उन्होंने बताया कि ये बैठक संगठन की नहीं बल्कि सरकार के मंत्रियों की थी, तो ऐसे में ये सवाल और भी गहरा हो जाता है कि इस बैठक में दोनों डिप्टी सीएम आखिर क्यों शामिल नहीं हुए? वो भी तब जब ये चर्चा खूब जोरों पर है कि यूपी बीजेपी में फिलहाल सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है

अपडेटेड Jul 17, 2024 पर 1:44 PM
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योगी की मीटिंग में नहीं पहुंचे मौर्य और पाठक, मंत्रियों की टीम में भी जगह नहीं

उत्तर प्रदेश बीजेपी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और अब ये खुल कर सामने भी आता दिख रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि यूपी की 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं और इसी के मद्देनजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने मंत्रियों के साथ बुधवार को एक अहम बैठक की, जिसमें आगामी उपचुनाव की तैयारियों और लोकसभा चुनाव के नतीजों पर चर्चा की गई है। हालांकि, हैरानी तब हुई, जब इस बैठक में राज्य के दोनों उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक इस बैठक से नदारद रहे।

बैठक खत्म होने के बाद स्वतंत्र देव सिंह ने मीडिया से बाहर आकर बातचीत की। उन्होंने बताया कि ये बैठक संगठन की नहीं बल्कि सरकार के मंत्रियों की थी, तो ऐसे में ये सवाल और भी गहरा हो जाता है कि इस बैठक में दोनों डिप्टी सीएम आखिर क्यों शामिल नहीं हुए? वो भी तब जब ये चर्चा खूब जोरों पर है कि यूपी बीजेपी में फिलहाल सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।

योगी की 30 मंत्रियों की टीम में डिप्टी CM नहीं


इसके अलावा News18 ने सूत्रों के हवाले से ये भी बताया कि उपचुनाव के लिए मुख्यमंत्री योगी ने अपने 30 मंत्रियों की एक टीम तैयार की है। बड़ी बात ये है कि इस टीम में भी दोनों डिप्टी सीएम- मौर्य और पाठक में से किसी को भी जगह नहीं दी गई।

ऐसे में यूपी के सियासी गलियारों में सवाल ये भी उठने लगे हैं कि क्या राज्य में सरकार बनाम संगठन की लड़ाई शुरू हो गई? क्या राज्य सरकार में जल्दी ही कोई बड़ा फेरबदल होने वाला है? क्या उत्तर प्रदेश सरकार के नेतृत्व में कोई बदलाव हो सकता है?

सवाल कई हैं, लेकिन जवाब के लिए अभी थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। तब आप ये जान लीजिए कि आखिर ये सब कब, कैसे और क्यों शुरू हुआ।

जेपी नड्डा से कैशव प्रसाद मौर्य की मुलाकात

दरअसल मंगलवार शाम दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ डिप्टी सीएम की करीब घंटे भर चली मुलाकात के बाद राज्य में 'सरकार बनाम संगठन' विवाद और गहरा गया।

News18 के मुताबिक, हालांकि, पार्टी सूत्रों ने कहा कि आगामी उपचुनावों में BJP की रणनीति और हाल के लोकसभा चुनावों में पार्टी का खराब प्रदर्शन बैठक का एजेंडा था, लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चा है, क्योंकि पिछले 48 घंटों में मौर्य की नड्डा के साथ यह दूसरी बैठक थी।

इससे पहले, डिप्टी सीएम ने 14 जुलाई को नड्डा से मुलाकात की थी, जब उन्होंने लखनऊ में राज्य कार्यकारिणी की बैठक ली थी, जहां योगी आदित्यनाथ, मौर्य, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और लगभग 3,500 प्रतिनिधि, जिनमें पार्टी के मौजूदा विधायक और सांसद और सभी लोकसभा चुनाव में हारे हुए सभी उम्मीदवार शामिल थे।

इसी दिन पहली बार 'सरकार Vs संगठन' का विवाद खड़ा हुआ था।

संगठन सरकार से बड़ा है: केशव प्रसाद मौर्य

बैठक को संबोधित करते हुए मौर्य ने कहा कि कोई भी सरकार संगठन से बड़ी नहीं होती। उन्होंने कहा, "मैं पहले एक पार्टी कार्यकर्ता हूं, फिर डिप्टी सीएम हूं।"

खबरों के मुताबिक, मौर्य ने जोर देकर कहा कि सरकार और सभी मंत्रियों, विधायकों और जन प्रतिनिधियों को पार्टी कार्यकर्ताओं का सम्मान करना चाहिए।

बैठक के तुरंत बाद, उन्होंने X पर एक पोस्ट डाला, जिसमें उन्होंने यही बात दोहराई, "संगठन सरकार से बड़ा है। कार्यकर्ताओं का दर्द मेरा दर्द है। संगठन से बड़ा कोई नहीं, कार्यकर्ता ही गौरव है।"

मौर्य की पोस्ट ने सवाल खड़े कर दिए, क्योंकि कुछ राजनीतिक जानकारों ने कहा कि ये बयान पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष को कम करने के लिए था। हालांकि, कुछ और लोगों ने कहा कि ये आदित्यनाथ और मौर्य के बीच 'कलह' का नतीजा है, जो ये बता रहा है कि UP BJP में सब कुछ ठीक नहीं है।

मौर्य की नाराजगी उन खबरों के बीच आई है कि पार्टी नेताओं का एक वर्ग योगी आदित्यनाथ सरकार से संतुष्ट नहीं है, क्योंकि उन्हें कोई समर्थन नहीं मिल रहा है।

UP में BJP को करना था कुछ और हो गया कुछ

हालांकि, News18 ने पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से कहा कि मौर्य का बयान योगी आदित्यनाथ पर कटाक्ष था और कहा कि इससे विपक्ष को BJP सरकार को घेरने के लिए और ज्यादा मौका मिलेगा।

रविवार की बैठक का हिस्सा रहे पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने इसे तनावपूर्ण बताया। सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर देकर चिंताओं को दूर करने के लिए नड्डा और मुख्यमंत्री की कोशिशों के बावजूद, अंदरूनी कलह लग रही थी। पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र ने कहा, "पार्टी की बैठक का मकसद एकजुट चेहरा पेश करना था, लेकिन जो संदेश गया, वो ये कि दोनों नेताओं के बीच दरार है।"

वहीं कुछ रिपोर्टों में ये भी कहा गया कि बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व इस 'संकट' से निपटने के लिए UP में पार्टी में कुछ बदलाव करने की योजना भी बना रहा है। मौर्य, जो RSS के समर्थन से पार्टी का ओबीसी चेहरा हैं, उन्हें इस संकट को हल करने के लिए पार्टी में कोई बड़ा पद भी दिया जा सकता है।

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