UP में कांवड़ रूट पर नेमप्लेट के आदेश से NDA में दरार! JDU और RLD BJP से खफा, कहा- धर्म, जाति को आगे बढ़ा रहे हैं

उत्तराखंड ने भी 'तीर्थयात्रियों की सुविधा' के लिए यात्रा रूट पर नेमप्लेट लगाने के लिए ऐसा ही आदेश जारी कर दिया है। विपक्ष तो पहले ही इस आदेश के विरोध में हैं और आलोचना भी कर रहा है, लेकिन अब NDA में BJP की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU)पार्टी भी इससे खुश नजर नहीं आ रही है। साथ ही UP में उसकी साथ राष्ट्रीय लोकदल ने भी इस आदेश को पूरी तरह से गलत बताया है

अपडेटेड Jul 19, 2024 पर 2:39 PM
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UP कांवड़ रूट पर नेमप्लेट के आदेश से NDA में दरार! JDU और RLD BJP से खफा (FILE PHOTO)

कांवड़ यात्रा वाले रूट पर पड़ने वाले सभी होटल, दुकान यहां तक की ठेले पर भी उनके मालिकों का नेमप्लेट लगाने का आदेश अब पूरी उत्तर प्रदेश में लागू हो गया है। पहले ये सिर्फ राज्य मुजफ्फरनगर जिले में लागू किया गया था और इसे लेकर काफी बवाल भी मचा है। इस पहल के बाद, उत्तराखंड ने भी 'तीर्थयात्रियों की सुविधा' के लिए यात्रा रूट पर नेमप्लेट लगाने के लिए ऐसा ही आदेश जारी कर दिया है। विपक्ष तो पहले ही इस आदेश के विरोध में हैं और आलोचना भी कर रहा है, लेकिन अब NDA में BJP की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU)पार्टी भी इससे खुश नजर नहीं आ रही है। साथ ही UP में उसकी साथ राष्ट्रीय लोकदल ने भी इस आदेश को पूरी तरह से गलत बताया है।

JDU नेता केसी त्यागी ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिए नारे- सबका साथ, सबका विकास के उलट बताया। साथ ही उन्होंने ये भी साफ किया कि ये आदेश बिहार, राजस्थान और झारखंड में लागू नहीं होगा।


'सबका साथ, सबका विकास' का उल्लंघन

न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए केसी त्यागी ने कहा, "इससे भी बड़ी (यूपी में) कांवड़ यात्रा बिहार में होती है। वहां ऐसा कोई आदेश लागू नहीं है। लगाए गए ये प्रतिबंध 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' का उल्लंघन है, जिसकी बात प्रधानमंत्री करते हैं... यह आदेश बिहार, राजस्थान, झारखंड में लागू नहीं है। इसकी समीक्षा हो तो अच्छा रहेगा।"

UP CMO ने आगे कहा कि हलाल सर्टिफिकेशन वाले प्रोडक्ट बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जबकि उत्तराखंड पुलिस ने नियमों का पालन करने में विफल रहने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

शराब पर भी प्रतिबंध लगाया जाए: RLD

वहीं उत्तर प्रदेश में BJP के गठबंधन साथी राष्ट्रीय लोकदल (RLD) ने इस फैसले काफी नाराजगी जताई है। RLD के राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी ने ANI से बात करते हुए कहा, "गांधीजी, चौधरी चरण सिंह और दूसरी हस्तियों ने धर्म और जाति को पीछे रखने की बात कही है। अब नेता ही राजनीति में धर्म और जाति को आगे बढ़ा रहे हैं। मुझे लगता है कि ये कदम सही नहीं है। आप किसी से सड़क पर ठेले पर अपना नाम क्यों लिखवाते हैं? उन्हें काम करने का अधिकार है...ये परंपरा बिल्कुल गलत है।"

त्यागी ने आगे कहा, "ये ग्राहक पर निर्भर है, वे जहां चाहें वहां से खरीदारी कर सकते हैं... मैं राजनेताओं से पूछना चाहता हूं - क्या शराब पीने से आप धार्मिक रूप से भ्रष्ट नहीं हो जाते? क्या ऐसा तभी होता है, जब आप मांस खाते हैं?"

उन्होंने शराब पर बैन लगाने की बात करते हुए कहा, "तो फिर शराब पर रोक क्यों नहीं है? वे शराब के बारे में क्यों नहीं बोलते? क्योंकि व्यापार करने वालों की सांठगांठ है, ये ताकतवर लोगों का खेल है। ये छोटी-छोटी दुकानें गरीबों द्वारा लगाई जाती हैं। तो आप उन पर उंगली उठा रहे हैं। मैं मांग करूंगा कि शराब पर भी प्रतिबंध लगाया जाए।"

हरिद्वार के SSP, प्रमोद सिंह डोबाल ने कहा, “होटल, ढाबा या स्ट्रीट फूड स्टॉल वाले सभी लोगों को अपने प्रतिष्ठान में मालिक का नाम, QR कोड और मोबाइल नंबर लिखने का आदेश दिया गया है। जो लोग इसका पालन नहीं करेंगे, उन्हें सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा और उन्हें कांवड़ रूट से भी हटा दिया जाएगा।"

ऐसे आदेश सांप्रदायिक तनाव बढ़ा सकते हैं: JDU

मुजफ्फरनगर में पुलिस ने कांवड़ यात्रा रूट (Kanwar Yatra Route) पर सभी दुकान, होटल और रेस्टोरेंट को उनके मालिकों की नेमप्लेट लगाने का आदेश दिया है, ताकि किसी भी तरह का ‘भ्रम’ न हो।

केसी त्यागी ने गुरुवार को ही इस फैसले की आलोचना की थी। त्यागी ने कहा, “कांवड़ यात्रा सदियों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों से होकर गुजरती रही है, लेकिन आज तक सांप्रदायिक तनाव की कोई खबर नहीं आई।”

उन्होंने कहा, “हिंदू, मुस्लिम और सिख भी स्टॉल लगाकर कांवड़ियों का स्वागत करते हैं। कांवड़ बनाने में मुस्लिम कारीगर भी शामिल होते हैं... ऐसे आदेश सांप्रदायिक तनाव बढ़ा सकते हैं।”

त्यागी ने कहा कि जिला प्रशासन को अपने फैसले की समीक्षा करनी चाहिए और इसे वापस लेना चाहिए।

उन्होंने कहा, “पुलिस को जांच करनी चाहिए कि कोई असामाजिक तत्व तो दुकान नहीं चला रहा, लेकिन धर्म या जाति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। इससे समाज में विभाजन बढ़ता है।”

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