UP Nikay Chunav: यूपी निकाय चुनाव में OBC आरक्षण रद्द, BJP पर हमलावर हुई SP, सरकार ने दिया ये जवाब

UP Nikay Chunav: उत्तर प्रदेश में होने वाले शहरी नगर निकाय चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने अहम फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने बिना OBC आरक्षण के नगर निकाय चुनाव कराने का आदेश दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद बीजेपी पर विपक्षी पार्टियां हमलावर हो गई हैं

अपडेटेड Dec 27, 2022 पर 2:34 PM
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UP Nikay Chunav: कोर्ट ने कहा कि जब तक ट्रिपल टेस्ट न हो, तब तक OBC आरक्षण नहीं होगा

UP Nikay Chunav: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए उत्तर प्रदेश में होने वाले शहरी निकाय चुनाव (UP Urban Local Body Elections 2023) में ओबीसी आरक्षण (OBC reservation) को रद्द कर दिया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ (Lucknow bench of Allahabad High Court) ने मंगलवार को यूपी में शहरी स्थानीय निकाय चुनाव बिना ओबीसी आरक्षण के कराने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि जब तक ट्रिपल टेस्ट न हो, तब तक ओबीसी आरक्षण नहीं होगा। पीठ ने शहरी स्थानीय निकाय चुनाव मुद्दे पर शनिवार को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने ओबीसी आरक्षण के लिए अलग कमीशन बनाने का निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब ओबीसी के लिए आरक्षित सभी सीटें जनरल मानी जाएंगी। यह फैसला जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस सौरव लवानिया की खंडपीठ ने सुनाया। पीठ ने राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (Other Backward Classes) के आरक्षण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 5 दिसंबर को जारी मसौदा अधिसूचना को रद्द कर दिया।

इसके साथ ही हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निकाय चुनावों को बिना ओबीसी आरक्षण के ही कराने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूले का पालन किए बिना OBC आरक्षण के मसौदे को तैयार करने को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं (PILs) पर यह फैसला आया है।


याचिकाकर्ताओं की दलील 

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई थी कि सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल सुरेश महाजन के मामले में दिए गए फैसले में स्पष्ट तौर पर आदेश दिया था कि स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण जारी करने से पहले ट्रिपल टेस्ट किया जाएगा। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने कहा कि जब तक ट्रिपल टेस्ट न हो तब तक ओबीसी आरक्षण नहीं होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फैसले के खिलाफ योगी सरकार सुप्रीम कोर्ट जा सकती है।

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'पिछड़े वर्ग के अधिकारों से कोई समझौता नहीं' 

हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) ने ट्वीट कर लिखा, "नगरीय निकाय चुनाव के संबंध में माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेश का विस्तृत अध्ययन कर विधि विशेषज्ञों से परामर्श के बाद सरकार के स्तर पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा, परंतु पिछड़े वर्ग के अधिकारों को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा!"

वहीं, समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party-SP) ने ट्वीट कर कहा, "भाजपा सरकार ने पिछड़ों को दिया धोखा! भाजपा की बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर के दिए संविधान को ख़त्म करने की साज़िश। निकाय चुनाव में पिछड़ों और दलितों का हक मारने के लिए भाजपा सरकार ने गलत तरीके से किया आरक्षण। पहले पिछड़ों का हो आरक्षण, फ़िर हो चुनाव।"

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