पश्चिम बंगाल (West Bengal) में लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024) से ठीक पहले ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को बड़ा झटका लगा है। उनके वरिष्ठ विधायक तापस रॉय (Tapas Rao) ने तृणमूल कांग्रेस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए सोमवार को पार्टी से जुड़े सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। कुछ हफ्ते पहले ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनके घर पर छापा मारा था। मीडिया के सामने तापस रॉय ने कहा कहा, "मैंने विधायक के रूप में अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को सौंप दिया है। मैं अब एक आजाद पंछी हूं।"
तापस रॉय ने कहा कि वह तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई आरोपों से तंग आ चुके हैं। साथ ही उन्होंने जिस तरह से संदेशखाली गांव के विवाद को हैंडल किया गया, उसे तरीके पर भी सवाल उठाए।
तापस रॉय ने क्यों दिया इस्तीफा?
रॉय ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "मैंने इसलिए इस्तीफा दिया, क्योंकि मुझे ऐसा महसूस हुआ कि मेरा सम्मान इस पार्टी में नहीं है। कई बार ऐसी परिस्थिति बनीं, जहां पर मुझे यह महसूस हुआ। मेरे घर पर 12 जनवरी को ED की टीम पहुंची थी, इस घटना को आज काफी दिन हो गए हैं, लेकिन पार्टी की ओर से किसी तरह की सहानुभूति या सहयोग नहीं मिला।"
उन्होंने मीडिया से कहा, "पार्टी जिस तरह से काम कर रही है, उससे मैं वास्तव में निराश हूं। मैं पार्टी और सरकार के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के इतने सारे आरोपों से तंग आ चुका हूं। दूसरी बात, संदेशखाली मुद्दे को जिस तरह से संभाला गया, मैं उसका समर्थन नहीं करता।"
रॉय ने नगर निकाय भर्तियों में कथित अनियमितताओं के सिलसिले में जनवरी में जब ED ने सेंट्रल कोलकाता में उनके बीबी गांगुली स्ट्रीट आवास पर छापा मारा था, तब उनके साथ खड़े नहीं होने के लिए TMC नेताओं की भी आलोचना की।
उन्होंने कहा, "मैं पिछले 25 साल से पार्टी का वफादार सिपाही रहा हूं। लेकिन मुझे मेरा हक नहीं मिला।"
तापस रॉय ने कहा, "तृणमूल कांग्रेस मेरे लिए नहीं है... इस पार्टी में जहां भी देखें भ्रष्टाचार ही दिखता है, अपराध कोई और करे और उसकी सज़ा बाकियों मिले यह सही नहीं है। मेरा काफी समय से विधानसभा से भी किसी तरह का संपर्क नहीं था। पार्टी के कार्यक्रम में भी शामिल नहीं हो रहा था और आज मैंने इस्तीफा दे दिया है। मैं आगे क्या करूंगा इस बारे में मैंने अभी कुछ तय नहीं किया है।"
वरिष्ठ TMC नेता कुणाल घोष और ब्रत्य बसु ने उन्हें मनाने के लिए आज सुबह रॉय से उनके आवास पर मुलाकात की, लेकिन असफल रहे।
तापस रॉय के पार्टी से इस्तीफे पर TMC नेता शांतनु सेन का कहना है, "तापस रॉय अब कह रहे हैं कि उन्हें पार्टी में कोई महत्व नहीं मिल रहा है, लेकिन चुनाव की घोषणा से 15 दिन पहले उन्हें अचानक यह बात क्यों सूझी? उन्होंने पहले क्यों नहीं बोला?...TMC ने आपको मंत्री बनाया, उप मुख्य सचेतक बनाया, संगठनात्मक प्रमुख बनाया। सुनने में आ रहा है कि आप अपनी विचारधारा बदल कर दूसरी पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं। क्या कोई आदमी अचानक ऐसा कर सकता है? जब तक की आपके पास दूसरी तरफ से कोई आकर्षक ऑफर न हो।"
तृणमूल कांग्रेस नेता तपस रॉय पहली बार 1996 में विद्यासागर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए थे। रॉय ने 2001 का विधानसभा चुनाव बारा बाजार से TMC के टिकट पर जीता था। वह 2011 में उत्तर 24 परगना जिले के बारानगर विधानसभा क्षेत्र में चले गए और तब से इस सीट से टीएमसी विधायक हैं। रॉय मौजूदा विधानसभा में टीएमसी के डिप्टी चीफ व्हिप भी थे।
कई रिपॉर्ट में ऐसा दावा किया गया है कि तापस रॉय का उत्तरी कोलकाता से टीएमसी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय के साथ विवाद चल रहा है।