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Private 5G: टेलीकॉम कंपनियां 5G सर्विस देना भी चाहती हैं और प्राइवेट 5G के खिलाफ भी हैं, जानिए क्या है पूरा मामला

5जी स्पेक्ट्रम पर अपनी ताजा सिफारिशों में ट्राई ने कहा है कि प्राइवेट कंपनियां सीधे सरकार से 5जी स्पेक्ट्रम हासिल कर सकती हैं। फिर वे अपना कैप्टिव वायरलेस प्राइवेट नेटवर्क (CWPNs) स्थापित कर सकती हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 13, 2022 पर 5:35 PM
Private 5G: टेलीकॉम कंपनियां 5G सर्विस देना भी चाहती हैं और प्राइवेट 5G के खिलाफ भी हैं, जानिए क्या है पूरा मामला
इंडिया में टाटा कम्युनिकेशंस (TCL), लार्सन एंड टूब्रो (L&T) और आईटीसी (ITC) सहित कई कंपनियों ने प्राइवेट 5जी नेटवर्क के प्रस्ताव का समर्थन किया है।

5G मोबाइल सेवाएं इंडिया में अभी शुरू नहीं हुई हैं। इससे पहले ही प्राइवेट 5G के विरोध में टेलीकॉम कंपनियां खुलकर आ गई हैं। 5जी मोबाइल सेवाओं शुरू होने से मोबाइल सेवा की दुनिया में बड़ा बदलाव आएगा। इंटरनेट की स्पीड बहुत बढ़ जाएगी। इससे इंटरनेट पर आपका काम चुटकियों में हो जाएगा।

इस साल के आखिर तक इंडिया में 5जी मोबाइल सेवाएं शुरू हो जाने की उम्मीद है। लोग 5जी सेवाएं शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। हम आज प्राइवेट 5जी सेवाओं के बारे में बात करने जा रहे हैं। क्या है प्राइवेट 5जी, यह पब्लिक 5जी से कितना अलग है, टेलीकॉम कंपनियां क्यों इसका विरोध कर रही है?

प्राइवेट 5जी का मतलब क्या है?

टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई (TRAI) ने ऑन डिमांड 5जी स्पेक्ट्रम एलॉट करने का प्रस्ताव पेश किया है। दरअसल, इसके तहत सरकार प्राइवेट यूज के लिए स्पेक्ट्रम एलॉट करेगी। यह पब्लिक 5जी सेवाओं से अलग होगा। जिन कंपनियों के कामकाज के लिए फास्ट इंटरनेट जरूरी है, वे प्राइवेट 5जी स्पेक्ट्रम के आवंटन के लिए सरकार के पास अप्लाई कर सकती हैं। इसके लिए उन्हें सरकार को फीस चुकानी होगी। पब्लिक 5जी और प्राइवेट 5जी की क्वालिटी में ज्यादा अंतर नहीं होगा। 5जी में इंटरनेट की स्पीड 10 जीबीपीएस तक होती है।

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