रेलवे मिनिस्ट्री ने प्राइवेट ट्रेनों के लिए 30,000 करोड़ रुपये के टेंडर के लिए कंपनियों की ओर से कम रिस्पॉन्स मिलने के बाद इसका दोबारा मूल्यांकन करने का फैसला किया है। इस टेंडर प्रोसेस की शुरुआत पिछले वर्ष जुलाई में हुई थी। शुरुआती दौर में 12 क्लस्टर्स के लिए 15 कंपनियों से एप्लिकेशन मिली थी।
इन कंपनियों में वेलस्पन एंटरप्राइसेज लिमिटेड, मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, IRB इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपर्स लिमिटेड, गेटवे रेल फ्रेट लिमिटेड, क्यूब हाइवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, L&T इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, भेल और सरकारी कंपनी IRCTC शामिल थी।
मिनिस्ट्री को इस वर्ष फरवरी तक क्लस्टर्स दिए जाने की उम्मीद थी लेकिन इस प्रोसेस में देरी हुई और जुलाई में फाइनेंशियल बिड्स खुलने पर केवल दो कंपनियां मेघा इंजीनियरिंग और IRCTC ही बच गई।
इस मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया टेंडर में प्राइवेट कंपनियों की ओर से कम हिस्सेदारी के कारण मिनिस्ट्री ने अब टेंडर के प्रोसेस पर दोबारा विचार किया जा रहा है और एक नया टेंडर मंगाया जा सकता है।
प्राइवेट कंपनी की ओर से रेलवे को फिक्स्ड हॉलेज चार्ज, एनर्जी चार्ज और बिडिंग के जरिए तय हुई ग्रॉस रेवेन्यू में हिस्सेदारी का भुगतान करना था।