Ayodhya Ram Mandir: बाबरी मस्जिद की खुदाई में ASI को भगवान राम का क्या-क्या सबूत मिला था?

Ayodhya Ram Mandir: 500 साल पुराने अयोध्या मंदिर-मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक आदेश के बाद श्रीराम जन्मभूमि पर भगवान श्रीराम के मंदिर का निर्माण हो रहा है। राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद के दौरान तत्कालीन विवादित परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की तरफ से कई बार खुदाई की गई। इस दौरान वहां भगवान राम के होने के कुछ ऐसे सबूत मिले जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले में काफी महत्वपूर्ण साबित हुआ।

अपडेटेड Jan 17, 2024 पर 10:39 AM
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Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के राम मंदिर में श्रीरामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को होगी

Ram Mandir Inauguration: अयोध्या में भव्य राम मंदिर के उद्घाटन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। अयोध्या के राम मंदिर में श्रीरामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को होगी। 22 जनवरी को अयोध्या धाम में अपने नव्य भव्य मंदिर में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम और पूजन विधि 16 जनवरी से शुरू हो गई है। जिस प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की जानी है, उसे 18 जनवरी को गर्भ गृह में अपने आसन पर खड़ा कर दिया जाएगा। 500 साल पुराने अयोध्या मंदिर-मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक आदेश के बाद श्रीराम जन्मभूमि पर भगवान श्रीराम के मंदिर का निर्माण हो रहा है।

राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद के दौरान तत्कालीन विवादित परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की तरफ से कई बार खुदाई की गई। इस दौरान वहां भगवान राम के होने के कुछ ऐसे सबूत मिले जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले में काफी महत्वपूर्ण साबित हुआ।

खुदाई में क्या मिला?


बाबरी मस्जिद की खुदाई में प्राचीन सीढ़ियां देखीं गई थी। इस दौरान बड़े गोलाकार वाला एक स्थान मिला था। ये तत्कालीन बाबरी मस्जिद की परिधि के बाहर और उसके चारों ओर थे। बाबरी मस्जिद के नीचे एक विशाल संरचना मौजूद थी जो मस्जिद से बहुत बड़ी थी। उस वक्त तत्काल इसका खुलासा नहीं हो पाया कि वह मंदिर था या होटल या महल, लेकिन वहां कुछ था जरूर...। एक शख्स ने दावा किया कि वह उस टीम का हिस्सा था जिसने दिसंबर 1949 में रात के अंधेरे में मस्जिद के केंद्रीय गुंबद के नीचे भगवान राम की मूर्ति रखी थी, जिसके कारण परिसर के दरवाजे बंद कर दिए गए थे।

सरदार पटेल द्वारा शाह बानो प्रकरण के बाद हिंदू भावनाओं को शांत करने के लिए 1986 में राजीव गांधी द्वारा दरवाजे खोल दिए गए थे। बाबरी मस्जिद के नीचे एक पुरानी और बहुत बड़ी संरचना मौजूद थी। मशहूर आर्कियोलॉजिस्ट केके मुहम्मद ने विस्तार से बताया कि आखिर अयोध्या में खुदाई के दौरान ASI को क्या-क्या मिला। मुहम्मद के मुताबिक, वह पहली बार साल 1976-77 में खुदाई के लिए अयोध्या गए थे। इसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर साल 2003 में वहां खुदाई की गई।

मुहम्मद के मुताबिक, साल 2003 की खुदाई के दौरान वहां 11वीं-12वीं शताब्दी का एक ऐसा शिलालेख मिला, जिसने सभी को हैरान कर दिया। मोहम्मद ने एक न्यूज वेबसाइट को बताया कि साल 1976-77 में जैसे वह अपनी टीम के साथ उस परिसर में गए तो देखा कि मस्जिद के सारे पिलर्स मंदिर के थे। वह पिलर्स करीब 11वीं-12वीं शताब्दी के लग रहे थे। बाबरी मस्जिद के लिए इन पिलर्स का इस्तेमाल ही किया गया था। ASI की खुदाई में मंदिर के 12 पिलर्स मिले। यह खुदाई काफी अहम साबित हुई।

प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम

प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की जानकारी देते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि कार्यक्रम से जुड़ी सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। प्राण प्रतिष्ठा दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगी। प्राण प्रतिष्ठा का मुहूर्त वाराणसी के पुजारी श्रद्धेय गणेश्वर शास्त्री ने निर्धारित किया है। वहीं, प्राण प्रतिष्ठा से जुड़े कर्मकांड की संपूर्ण विधि वाराणसी के ही लक्ष्मीकांत दीक्षित द्वारा कराई जाएगी।

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उन्होंने बताया, "पूजन विधि 16 जनवरी से शुरू होकर 21 जनवरी तक चलेगी। 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा के लिए न्यूनतम आवश्यक गतिविधियां आयोजित होंगी।" राय ने कहा कि राम लला की मौजूदा मूर्ति जो 1950 से वहां है, को भी नए मंदिर के गर्भगृह में रखा जाएगा।

राय ने ये भी बताया कि प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर गर्भ गृह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ, राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास और सभी न्यायी उपस्थित रहेंगे।

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