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राम मंदिर का विवाद कैसे शुरू हुआ और जानिए क्या है राम चबूतरा!

राम मंदिर के गिराए जाने के बाद इस बात के को लेकर कई बार प्रयास हुए कि वहां पर हिंदुओं को पूजा करने दी जाए। 1852 में इस मामले को लेकर फिर दंगा हुआ और बाबरी मस्जिद पर कब्जे का प्रयास हुआ। लेकिन अंग्रेजों ने वहां पर शांति व्यवस्था कायम कराई और आदेश दिया की मस्जिद के अंदर नमाज होगी और बाहर राम चबूतरे पर पूजा होगी

Brijesh Shuklaअपडेटेड Jan 01, 2024 पर 6:30 AM
राम मंदिर का विवाद कैसे शुरू हुआ और जानिए क्या है राम चबूतरा!
राम मंदिर का पूरा विवाद कब और कैसे शुरू हुआ और इतिहास में इसका क्या जिक्र है!

"दुर्भाग्यपूर्ण है कि हिंदुओं के पवित्र स्थान को गिरा कर यहां पर मस्जिद बना दी गई लेकिन अब बहुत मुश्किल है इस शिकायत का कोई हल निकल पाना क्योंकि इस घटना के 356 साल गुजर चुके हैं। इसलिए अब जो किया जा सकता है वह यही है कि सभी पक्ष स्टेटस यानि यथास्थिति बनाए रखे। यानी मस्जिद में नमाज होती रहे और बाबरी मस्जिद से लगे चबूतरे पर राम लला की पूजा हो।"

कर्नल एफ ई ए शेमियर, जिला जज फैजाबाद वर्ष 1886 ई इस टिप्पणी के साथ जिला जज ने महंत रघुवर दास कि उस मुकदमे को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने मस्जिद के बगल में चबूतरे में मंदिर बनाने की अनुमति मांगी थी और यह दावा किया था कि राम जन्मभूमि तोड़कर मस्जिद का निर्माण किया गया है। जिला जज ने स्वयं उसे क्षेत्र का निरीक्षण किया और जांच में पाया कि राम मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण किया गया। जिला जज की यह टिप्पणी बहुत महत्वपूर्ण थी।

आखिर कब राम चबूतरे पर मूर्तियां स्थापित की गईं?

इस संवाददाता ने अयोध्या कवरेज के दौरान यह जानने की उत्सुकता हमेशा रही कि बाबरी ढांचे से जुड़े हुए राम चबूतरे पर मूर्तियां कब स्थापित की गई थी और वहां अनवरत कीर्तन कब से चल रहा था। जो आंखोंसे देखा वह यही था कि अयोध्या के तमाम साधु संत उस चबूतरे के बाहर बैठकर राम नाम संकीर्तन किया करते थे । जबकि बड़ी संख्या में श्रद्धालू वहां पहुंच कर बाहर से ही राम लगा के दर्शन करते थे और और साधु सेवा भी करते थे।

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