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RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने आगे भी ब्याज दरों में कटौती के दिए संकेत, रुपये की कमजोरी पर कही ये बात

RBI Monetary Policy : आरबीआई गवर्नर मल्होत्रा ​​ने रुपये के गिरते स्तर के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि RBI किसी खास स्तर या बैंड को लक्ष्य नहीं बनाता है और वह केवल भारी वौलेटिलिटी को रोकने के लिए हस्तक्षेप करता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 08, 2025 पर 3:55 PM
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने आगे भी ब्याज दरों में कटौती के दिए संकेत, रुपये की कमजोरी पर कही ये बात
RBI Policy : आरबीआई गवर्नर ने अर्थव्यवस्था में सुस्ती को स्वीकार किया और उम्मीद जताई है कि ब्याज दरों में कटौती से खपत को बढ़ावा मिलेगा तथा ग्रोथ में तेजी आएगी

RBI rate cut : आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ( Sanjay Malhotra) ​​ने MPC द्वारा रेपो रेट (repo rate) में 25 आधार अंकों की कटौती के एक दिन बाद भविष्य में ब्याज दरों में कटौती के बारे में बड़ा संकेत दिया। आरबीआई बोर्ड की बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ मीडिया को संबोधित करते हुए गवर्नर मल्होत्रा ​​ने कहा कि आरबीआई ने हमेशा आसानी के कर्ज उपलब्ध कराने पर फोकस किया है और इसमें सुधार की गुंजाइश है। उन्होंने आगे कहा कि RBI सुगमता से ऋण उपलब्ध कराने के लिए आगे भी कदम उठाएगा।

आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने लगातार 11 बार दरों को स्थिर रखने के बाद कल इसमें 25 बेसिस प्वाइंट (0.25 फीसदी) की कटौती का फैसला लिया। इस कटौती के बाद अब रेपो दर को पहले के 6.5 फीसदी से घटाकर 6.25 फीसदी पर आ गई। यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था में मंदी के मद्देनजर उठाया गया है। अग्रिम अनुमानों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की विकास दर 6.4 फीसदी आंकी गई है। आरबीआई गवर्नर ने अर्थव्यवस्था में सुस्ती को स्वीकार किया और उम्मीद जताई है कि ब्याज दरों में कटौती से खपत को बढ़ावा मिलेगा तथा ग्रोथ में तेजी आएगी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा है कि मौद्रिक और राजकोषीय नीतियां विकास और महंगाई के मोर्चे पर मिलकर आगे बढ़ रही हैं और इससे अर्थव्यवस्था को फायदा होगा।

आम आदमी के लिए बजट में कर कटौती और रेपो दर में कमी के रूप में दोहरा लाभ इकोनॉमी के सेंटीमेंट को सुधारने में मदद करेगा। वित्त मंत्री ने 1 फरवरी को आए बजट में घोषणा की है कि सालाना 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई कर नहीं लगेगा। सरकार ने एक तरह से बहुत जरूरी राहत उपाय के तौर पर करों में कटौती के रूप में इकोनॉमी को 1 लाख करोड़ रुपये का राहत पैकेज दिया है।

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