आरबीआई ने इस वित्त वर्ष के लिए इनफ्लेशन के अनुमान में बदलाव नहीं किया है। केंद्रीय बैंक ने इसे 4.8 फीसदी पर बनाए रखा है। हालांकि, उसने इस वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के इनफ्लेशन के अनुमान को 4.5 फीसदी से घटाकर 4.4 फीसदी कर दिया है। इसका ऐलान रिजर्व बैंक के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 7 फरवरी को अपनी क्रेडिट पॉलिसी में किया। यह मल्होत्रा की पहली मॉनटरी पॉलिसी थी। साथ ही यह आरबीआई की इस साल (2025) की पहली मॉनेटरी पॉलिसी है।
अक्टूबर के बाद रिटेल इनफ्लेशन में कमी का ट्रेंड
संजय मल्होत्रा ने मॉनेटरी पॉलिसी 7 फरवरी को सुबह 10 बजे पेश करते हुए कहा कि अक्टूबर में रिटेल इनफ्लेशन अक्टूबर में टारगेट से ऊपर निकल गया था। अब उसमें नरमी आ रही है। नवंबर और दिसंबर में इसमें कमी आई है। हालांकि, यह अब भी 5.2 फीसदी पर है। उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में महंगाई खासकर खानेपीने की चीजों की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है।
रबी की फसल अच्छी रहने की उम्मीद
आरबीआई के गवर्नर ने कहा कि सप्लाई को लेकर किसी तरह की प्रॉब्लम नहीं दिख रही है। रबी फसलों का उत्पादन भी अच्छा रहने की उम्मीद है। इसका असर फूड इनफ्लेशन पर पड़ेगा। खानेपीने की चीजों की कीमतों मे नरमी देखने को मिलेगी। उन्होंने कहा कि कोर इनफ्लेशन बढ़ने के आसार हैं, लेकिन यह कंट्रोल में बना रहेगा। हालांकि, उन्होंने ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट्स की अनिश्चितता को लेकर थोड़ी चिंता जताई।
क्रूड ऑयल की कीमतों में उतारचढ़ाव
मल्होत्रा ने कहा कि ग्लोबल एनर्जी प्राइसेज में उतारचढ़ाव दिख रहा है। अगर एनर्जी की कीमतें बढ़ती हैं तो इसका असर इनफ्लेशन पर पड़ेगा। उनका मतलब क्रूड ऑयल के प्राइसेज से था। इंडिया क्रूड ऑयल की अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इंपोर्ट करता है। इससे ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने का सीधा असर सरकार के इंपोर्ट बिल पर पड़ता है।
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इनफ्लेशन लगातार 5 फीसदी से ऊपर
दिसंबर 2025 में रिटेल इनफ्लेशन घटकर 5.22 फीसदी पर आ गया। यह बीते चार महीनों में सबसे कम इनफ्लेशन है। हालांकि, लगातार चौथे महीने इनफ्लेशन 5 फीसदी से ऊपर बना हुआ है। अगले हफ्ते जनवरी के रिटेल इनफ्लेशन के डेटा सरकार जारी करेगी। इससे पता चलेगा कि महंगाई बढ़ी है या घटी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल महंगाई में बड़ी राहत मिलती नहीं दिख रही है। जब तक फूड इनफ्लेशन में बड़ी कमी नहीं आती है, महंगाई 5 फीसदी के करीब बनी रहेगी।