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Same-Sex Marriage Verdict: सेम सेक्स मैरिज को नहीं मिली कानूनी मान्यता, CJI बोले- कानून में बदलाव संसद का काम

Same-Sex Marriage Verdict: CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि समलैंगिकता सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है। बल्कि गांव में कृषि कार्य में काम करने वाली एक महिला भी समलैंगिक हो सकती है। पीठ ने कहा कि ये कहना कि विवाह की संस्था स्थिर और अपरिवर्तनीय है, सही नहीं है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा कि समलैंगिक कपल्स को भी सामान्य लोगों की तरह उनको उनका अधिकार मिलना चाहिए

Akhileshअपडेटेड Oct 17, 2023 पर 2:09 PM
Same-Sex Marriage Verdict: सेम सेक्स मैरिज को नहीं मिली कानूनी मान्यता, CJI बोले- कानून में बदलाव संसद का काम
Same-Sex Marriage Verdict: केंद्र ने सेम सेक्स मैरिज को कानूनी मान्यता देने का आग्रह करने वाली याचिकाओं का विरोध किया था (FILE PHOTO: REUTERS)

Same-Sex Marriage Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने सेम सेक्स मैरिज यानी समलैंगिक विवाह (Same-Sex Marriage) को कानूनी मान्यता देने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुना दिया है। CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने अपना फैसला सुनाते हुए समलैंगिक शादी को मान्यता देने से इनकार कर दिया है। CJI ने कहा कि ये संसद के अधिकार क्षेत्र का मामला है। सुप्रीम कोर्ट ने 3-2 के बहुमत से फैसला देते हुए कहा कि यह विधायिका का अधिकार क्षेत्र है। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को समलैंगिक कपल्स के लिए उचित कदम उठाने के आदेश दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेश समलैंगिक समुदाय के संघ में प्रवेश के अधिकार के खिलाफ भेदभाव नहीं करेंगे। CJI ने कहा कि यह कोर्ट कानून नहीं बना सकता, सिर्फ व्याख्या कर उसे लागू करा सकता है। स्पेशल मैरिज एक्ट के प्रावधानों में बदलाव की जरूरत है या नहीं, यह तय करना संसद का काम है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "विवाह का कोई अयोग्य अधिकार नहीं है सिवाय इसके कि इसे कानून के तहत मान्यता प्राप्त है। नागरिक संघ को कानूनी दर्जा प्रदान करना केवल अधिनियमित कानून के माध्यम से ही हो सकता है। समलैंगिक संबंधों में ट्रांससेक्सुअल व्यक्तियों को शादी करने का अधिकार है।" इस मामले में चार अलग-अलग फैसला आया है।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने 10 दिनों की सुनवाई के बाद 11 मई को याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। पीठ के अन्य सदस्यों में जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस एस रवींद्र भट, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस पीएस नरसिम्हा शामिल हैं।

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