सुप्रीम कोर्ट ने कृष्णा नदी के पानी के बंटवारे से जुड़े विवाद का सोमवार को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से आपसी सहमति से समाधान करने को कहा। आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से दायर याचिका की देश के चीफ जस्टिस एन वी रमन्ना की अगुवाई वाली बेंच ने सुनवाई की। जस्टिस रमन्ना ने कहा कि बेंच इस मामले के कानूनी पहलुओं पर फैसला नहीं देगी।
हालांकि, अगर दोनों राज्य सहमत होते हैं तो बेंच मध्यस्थता की प्रक्रिया में मदद कर सकती है।
जस्टिस रमन्ना का कहना था, "मैं दोनों राज्यों से जुड़ा हूं। मैं कानूनी तौर पर इस मामले की सुनवाई नहीं करना चाहता। हालांकि, अगर मामला मध्यस्थता से सुलझाया जा सकता है तो कृपया ऐसा करें। ऐसा नहीं होने हमें यह मामला किसी अन्य बेंच को भेजना होगा।"
आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे ने कहा कि उन्हें इस मुद्दे पर सक्षम अथॉरिटीज से बात करनी होगी।
इस पर जस्टिस रमन्ना ने कहा, "मैं केवल यह चाहता हूं कि आप अपनी सरकारों को किसी तीसरे पक्ष को शामिल किए बिना इसका समाधान निकालने के लिए आश्वस्त करें।"
इस मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी।
आंध्र प्रदेश सरकार ने याचिका में आरोप लगाया है कि तेलंगाना सरकार उसे पीने और सिंचाई के लिए पानी का वैध हिस्सा नहीं दे रही।