पेरिस पैरालिंपिक 2024 में गोल्ड मेडल जीतने वाले पैरा-तीरंदाज हरविंदर सिंह ने प्रतिष्ठित मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार के लिए नामांकित व्यक्तियों की लिस्ट में अपना नाम नहीं होने पर "भेदभाव" की बात कही। हरविंदर ने इस साल की शुरुआत में पुरुषों की व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा, जो पैरालिंपिक में तीरंदाजी में देश का पहला गोल्ड मेडल था। हालांकि, शॉर्टलिस्ट किए गए 30 उम्मीदवारों की लिस्ट से अपना नाम गायब होने पर, हरियाणा के पैरा आर्चर ने सोशल मीडिया निराशा जताई।
उन्होंने X प्रधानमंत्री कार्यालय को टैग करते हुए लिखा, "'खेलों में भेदभाव' टोक्यो 2020 पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेताओं को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया, लेकिन पेरिस 2024 पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेताओं का क्या? वही प्रतियोगिता, वही गोल्ड, फिर वही गौरव, वही पुरस्कार क्यों नहीं?"
हरविंदर के कोच और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता जीवनजोत सिंह तेजा ने भी इस बात पर दुख जताया। उन्होंने सम्मान के लिए पैरा आर्चर पर विचार करने के लिए संबंधित समिति को भेजे एक मेल का स्क्रीनशॉट शेयर किया।
कोच ने गिनाईं हरविंदर की उपलब्धियां
उन्होंने कहा, "2021 में, सभी टोक्यो ओलंपिक और पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेताओं को खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। मैं विनम्रतापूर्वक हरविंदर के लिए आपसे अनुरोध करता हूं, जिन्होंने भारत के पहले व्यक्तिगत पैरालंपिक गोल्ड और कई दूसरे पदकों के साथ इतिहास रचा। उनकी उपलब्धियां हम सभी को प्रेरित करती हैं।"
मेल में, जीवनजोत ने हरविंदर की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला, जिसमें पैरालिंपिक में स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय पैरा-तीरंदाज, पैरालिंपिक में कांस्य जीतने वाले पहले भारतीय पैरा-आर्चर, पैरा एशियाई खेलों में स्वर्ण और 2022 एडिशन में ब्रॉन्ज जीतने वाले एकमात्र पैरा-आर्चर हैं।
वहीं भारत की टॉप शूटर मनु भाकर का नाम भी शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों के बीच से गायब है। इस पर पहले शूटर मनु भाकर और उनके पिता ने भी दुख जताते हुए कहा, "मुझे अपनी बेटी को क्रिकेटर बनाना चाहिए थे, शूटर बना कर शायद गलती कर दी।"
हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद मनु भाकर ने X पर एक पोस्ट कर अपनी सफाई दी और कहा शायद नॉमिनेशन दाखिल करते समय उनकी ओर से ही कुछ गलतियां हुई होंगी। मनु भाकर ने एक ही ओलंपिक एडिशन में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनकर इतिहास रचा था।