डी गुकेश ने चेस में रचा इतिहास, सबसे कम उम्र के वर्ल्ड चैंपियन बने, चीन के डिंग लिरेन को हराया

World Chess Championships: भारतीय ग्रैंडमास्टर डी गुकेश गुरुवार को रोमांचक 14वीं और आखिरी बाजी में गत चैंपियन चीन के डिंग लिरेन को हराकर 18 साल की उम्र में सबसे कम उम्र के विश्व शतरंज चैंपियन बने। वह दिग्गज विश्वनाथन आनंद के बाद वैश्विक खिताब जीतने वाले दूसरे भारतीय हैं

अपडेटेड Dec 12, 2024 पर 7:18 PM
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World Chess Championships 2024: भारतीय ग्रैंडमास्टर डी गुकेश चेस के वर्ल्ड चैंपियन बनने वाले भारत के दूसरे खिलाड़ी हैं

World Chess Championships: भारतीय ग्रैंडमास्टर डी गुकेश ने वर्ल्ड शतरंज चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम कर लिया है। गुकेश गुरुवार (12 दिसंबर) को 14वीं और अंतिम बाजी में चीन के डिंग लिरेन को हराकर सबसे युवा शतरंज विश्व चैंपियन बने। उनकी उम्र महज 18 साल है। भारतीय ग्रैंडमास्टर सिंगापुर में हुए रोमांचक 14वीं और आखिरी बाजी में गत चैंपियन को हराकर विश्व विजेता बने।

गुकेश ने 14 बाजी के इस मुकाबले की आखिरी क्लासिकल बाजी जीतकर लिरेन के 6.5 के मुकाबले जरूरी 7.5 अंक के साथ खिताब जीता। यह बाजी हालांकि अधिकांश समय ड्रॉ की ओर जाती दिख रही थी। गुरुवार को गुकेश की खिताबी जीत से पहले रूस के दिग्गज गैरी कास्पारोव सबसे कम उम्र के विश्व शतरंज चैंपियन थे जिन्होंने 1985 में अनातोली कार्पोव को हराकर 22 साल की उम्र में खिताब जीता था।

गुकेश इस साल की शुरुआत में कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतने के बाद विश्व खिताब के लिए चुनौती पेश करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने थे। वह दिग्गज विश्वनाथन आनंद के बाद वैश्विक खिताब जीतने वाले दूसरे भारतीय हैं। पांच बार के विश्व चैंपियन आनंद ने अपना आखिरी खिताब 2013 में जीता था।


विश्व शतरंज चैंपियनशिप जीतने के बाद डी गुकेश ने कहा कि मैं पिछले 10 सालों से इस पल का सपना देख रहा था। मुझे खुशी है कि मेरा यह सपना पूरा हुआ। उन्होंने कहा कि मैं थोड़ा भावुक हो गया था क्योंकि मुझे जीत की उम्मीद नहीं थी। लेकिन फिर मुझे आगे बढ़ने का मौका मिला।

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मैच में 13 उतार-चढ़ाव भरे खेलों के बाद अंतिम मुकाबले में दोनों प्रतियोगी बराबरी पर थे। दोनों ने 6.5 अंक हासिल किए थे। उन्हें विश्व चैंपियन का खिताब जीतने के लिए एक अंक की जरूरत थी। सफेद मोहरों से खेल रहे डिंग ने एक बहादुरी भरा कदम उठाया। अपने आजमाए हुए लंदन ओपनिंग को स्थगित कर दिया और रिवर्स ग्रुनफील्ड का विकल्प चुना। इससे यह पता चला कि डिफेंडिंग चैंपियन किसी भी कीमत पर आसान ड्रॉ के लिए समझौता नहीं करना चाहता। हालांकि गुकेश ने खुद को नहीं हिलाया।

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