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Sudan Conflict: सूडान में फंसे भारतीयों को सड़क मार्ग से निकालने की योजना बना रहा भारत

Sudan conflict: विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि संघर्षग्रस्त सूडान में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने की तैयारी के लिए भारत कई विकल्पों पर काम कर रहा है। भारतीय वायुसेना के दो C-130J विमानों को जेद्दाह में तैनात रखा गया है और INS सुमेधा पोर्ट सूडान पहुंच चुका है। प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को अधिकारियों को संघर्षग्रस्त देश में फंसे लगभग 3,000 भारतीय नागरिकों के लिए आकस्मिक निकासी योजना तैयार करने का निर्देश दिया

Curated By: Akhileshअपडेटेड Apr 23, 2023 पर 7:20 PM
Sudan Conflict: सूडान में फंसे भारतीयों को सड़क मार्ग से निकालने की योजना बना रहा भारत
Sudan conflict: सूत्रों ने बताया कि भारत सूडान में फंसे भारतीय नागरिकों को सड़क मार्ग से निकालेगा। हिंसक एरिया से बाहर के लोगों को पहले बचाया जाएगा

Sudan Conflict: सूत्रों ने कहा है कि भारत सूडान (Indian Citizens in Sudan) में फंसे भारतीयों को सड़क मार्ग से निकालने की योजना बना रहा है, जहां अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्स और सूडानी सशस्त्र बलों के बीच दो सप्ताह से संघर्ष चल रहा है। सूत्रों ने कहा कि जो लोग संघर्ष एरिया से बाहर हैं और कम हिंसा वाले क्षेत्रों में हैं उन्हें सड़क मार्ग से निकाला जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसक एरिया से बाहर के लोगों को पहले बचाया जाएगा। लगातार हिंसा और फायरिंग वाले इलाकों में फंसे भारतीयों को हिंसा कम होते ही वहां से निकाल लिया जाएगा। राजधानी में संघर्ष शुरू होने के तुरंत बाद खार्तूम इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बंद कर दिया गया था।

पीएम मोदी ने दिए निर्देश

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिंसा प्रभावित सूडान में भारतीयों से संबंधित स्थिति की समीक्षा के लिए शुक्रवार 21 अप्रैल को एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को अधिकारियों को संघर्षग्रस्त देश में फंसे लगभग 3,000 भारतीय नागरिकों के लिए आकस्मिक निकासी योजना तैयार करने का निर्देश दिया।

लगभग 3000-4000 भारतीय सूडान में फंसे हुए हैं और उनमें से अधिकांश राजधानी खार्तूम में फंसे हुए हैं, जो लड़ाई का केंद्र है। PMO ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने सूडान में हाल के घटनाक्रमों का आकलन किया और देश भर में वर्तमान में स्थित 3,000 से अधिक भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने के साथ जमीनी स्थितियों की पहली रिपोर्ट प्राप्त की।"

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