आपने अब तक सब्जियों के ठेले पर, मंदिर में, दान दक्षिणा के लिए डिजिटल कैशलेस ट्रांजैक्शन (Digital Cashless Transaction) की सुविधा देखी होगी, लेकिन अगर हम कहें कि एक शख्स रिश्वत (Bribe) भी डिजिटल तरीके से लेता था, तो वो भी QR कोड (QR Code) के जरिए, हैं ना चौंकाने वाला। आइए मिलवाते हैं, इस कलाकर से... ये शख्स इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) में अर्दली है और ये अदालत परिसर के अंदर वकीलों से Paytm के जरिए पैसे यानी बख्शीश लेता था। इसकी खास बात ये थी कि ये अपनी कमर में QR कोड लगा कर रखता था।
Bar&Bench के मुताबित, अर्दली की यह करतूत सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल ने मामले को गंभीरता से लिया और अर्दली के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। ये अर्दली वर्तमान में जस्टिस अजीत सिंह की कोर्ट से अटैच था। अब इसे सस्पेंड कर दिया गया है।
मुख्य न्यायाधीश बिंदल को लिखे एक पत्र में, जस्टिस सिंह ने कहा कि अर्दली, राजेंद्र कुमार- I, कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों से बख्शीश लेने के लिए अपनी कमर पर Paytm वॉलेट/क्यूआर कोड लिए हुए था।
रजिस्ट्रार जनरल आशीष गर्ग की तरफ से इस अर्दली का निलंबन आदेश पारित किया। इसमें कहा गया है, "माननीय मुख्य न्यायाधीश के आदेश दिनांक 29.11.2022 के तहत माननीय जस्टिस अजीत सिंह के दिनांक 29.11.2022 के पत्र पर विचार करने के बाद पारित किया गया, जिसमें कोर्ट अर्दली, श्री राजेंद्र कुमार- I, कर्मचारी नंबर 5098 के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए निलंबन का आदेश दिया गया है।"
इस आदेस में सस्पेंशन का कारण कोर्ट परिसर में Paytm वॉलेट का इस्तेमाल ही बताया गया है। आदेश मुताबिक, राजेंद्र कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
सस्पेंशन पीरियड के दौरान, वह हाई कोर्ट के नजारत (प्रोसेस सर्विंग एजेंसी) अनुभाग से अटैच रहेंगे और रजिस्ट्रार की बिना मंजूरी के स्टेशन भी नहीं छोड़ सकते।
निलंबन आदेश में आगे कहा गया है कि अर्दली को निलंबन के दौरान निर्वाह भत्ता (subsistence allowance) मिलोगा। बशर्ते कि वह एक प्रमाण पत्र पेश करे कि वह किसी दूसरे रोजगार, व्यापार, पेशे या व्यवसाय नहीं कर रहा है।