Asaram Bapu Bail: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (7 जनवरी) को स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम बापू को मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत दे दी। शीर्ष अदालत ने आसाराम को निर्देश दिया है कि वह अंतरिम जमानत पर रिहा होने के बाद अपने अनुयायियों से नहीं मिलेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने 2013 के बलात्कार मामले में स्वयंभू संत आसाराम को मेडिकल आधार पर 31 मार्च तक अंतरिम जमानत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने 85 वर्षीय आसाराम बापू को निर्देश दिया है कि वे सबूतों से छेड़छाड़ न करें और रिहाई के बाद अपने अनुयायियों से मिलें।
आसाराम बापू को जोधपुर की एक अदालत ने अपने आश्रम में एक किशोरी के साथ बलात्कार करने के आरोप में दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 2023 में उन्हें गुजरात की एक अदालत ने 2013 में अपने आश्रम में एक महिला शिष्य के साथ कई मौकों पर बलात्कार करने के आरोप में दोषी ठहराया। आसाराम को पुणे जाने के लिए समय-समय पर पैरोल दी जाती रही है, जहां उनका इलाज चल रहा है।
बापू का फिलहाल जोधपुर के आरोग्य मेडिकल सेंटर में इलाज चल रहा है। वे जोधपुर सेंट्रल जेल में अपनी सजा काट रहे हैं। आसाराम को जोधपुर पुलिस ने 31 अगस्त, 2013 को बलात्कार के एक मामले में गिरफ्तार किया था। तब से वह जेल में है। एक किशोरी ने उन पर जोधपुर के पास मनाई गांव में उनके आश्रम में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर की रहने वाली लड़की आश्रम की छात्रा थी।
मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, आसाराम हार्ट के मरीज हैं। उन्हें पहले भी दिल का दौरा पड़ चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि निगरानी सुनिश्चित करने के लिए उनकी जमानत अवधि के दौरान कानून प्रवर्तन अधिकारियों को तैनात किया जाए। सुप्रीम कोर्ट का यह बेल आदेश आसाराम के 17 दिन की पैरोल पर रिहा होने के छह दिन बाद राजस्थान की जोधपुर जेल में वापस आने के बाद आया है।
बापू को सुप्रीम कोर्ट से राहत पिछले महीने 18 दिसंबर को 17 दिनों के लिए पैरोल दिए जाने के कुछ दिनों बाद मिली है। वह 1 जनवरी को जोधपुर जेल लौट आए। पिछले साल अगस्त में राजस्थान हाई कोर्ट ने भी उन्हें इलाज के लिए सात दिनों के लिए पैरोल दी थी।
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अप्रैल 2018 में जोधपुर की एक अदालत ने आसाराम बापू को 2013 में अपने आश्रम में एक नाबालिग से बलात्कार करने का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। बाद में उनके दो साथियों को भी इसी मामले में अदालत ने 20 साल जेल की सजा सुनाई थी।