Chaitra Navratri 2024: 9 अप्रैल यानी आज से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। नवरात्रि का मतलब 9 रातें होती है। नवरात्रि में घटस्थापना, सप्तशती पाठ और उपवास और हवन आदि से ही देवी को प्रसन्न नहीं किया जाता। इतना ही नहीं नौ दिनों में दो से लेकर 9 साल की तक की कन्याओं का पूजन भी किया जाता है। उन्हें कुछ उपहार देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। चैत्र की नवरात्रि आमतौर पर मार्च-अप्रैल महीने में मनाई जाती है। नौ दिनों तक चलने वाले इस त्योहार में देवी दुर्गा और उनके कई रूपों की पूजा की जाती है।
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना और मां शैल पुत्री की पूजा होती है। इस बार नवरात्रि पूरे 9 दिनों की है। चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ के साथ ही हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2081 शुरू हो चुका है। इस दिन को महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा और आंध्र प्रदेश में उगादी पर्व के रूप में भी मनाया जाता है।
नवरात्रि के पहले दिन का महत्व
नवरात्रि पर मां दुर्गा के सभी भक्त पूजा-पाठ, उपवास रखते हुए मां को प्रसन्न करते हैं। ताकि मां उन्हे सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मिले। नवरात्रि का पहला दिन यानी प्रतिपदा तिथि मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप देवी शैलपुत्री को समर्पित होता है। इस दिन जौ बोने और कलश स्थापन-पूजन के साथ इन्हीं देवी का पूजन किया जाता है। माता की मूर्ति की स्थापना के लिए चंदन की लकड़ी से बना पाट सबसे अच्छा होता है। महाशक्ति की आराधना का पर्व नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा के अलग-अलग नौ रूपों की पूजा की जाती है। इसमें पहला- शैलपुत्री, दूसरा- ब्रह्मचारिणी, तीसरा-चंद्रघंटा, चौथा- कूष्मांडा, पांचवा- स्कंदमाता, छठा- कात्यायनी, सांतवा- कालरात्रि, आठवां-महागौरी और नौवां- सिद्धिदात्री देवी की पूजा-अर्चना की जाती है। जिन्हें नवदुर्गा की संज्ञा दी गई है।
आमतौर पर कई परिवारों में अष्टमी या नवमी तिथि को एक साथ नौ कन्याओं को बुलाया जाता है। उनका पूजन कर भोजन करा दिया जाता है। लेकिन पुराणों के अनुसार प्रतिपदा से नवमी तक सभी दिन अलग-अलग आयु वर्ग की कन्या पूजन का विशेष खास फायदे होते हैं। कहा जाता है कि कन्या पूजन के दौरान उन्हें 1 रुपये का सिक्का जरूर देना चाहिए।