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हफ्ते में 90 घंटे काम करने को लेकर बहस के बीच विप्रो के बॉस ने कहा, मुझे वर्क-लाइफ बैलेंस में अटूट भरोसा

विप्रो के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन रिशद प्रेमजी का कहना है कि उनका वर्क-लाइफ बैलेंस में अटूट भरोसा है। काम के घंटे को लेकर को चल रही हालिया बहस के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने यह बात कही। प्रेमजी ने 23 जनवरी को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, दावोस में कहा, 'आप जो संतुलन चाहते हैं, उसका मतलब काम करना और उसके बाद अपना दिमाग ठंडा करना है, न कि 10/20/30 या 70 घंटे गिनना। बहरहाल, मेरा वर्क-लाइफ बैलेंस में अटूट भरोसा है'

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 23, 2025 पर 10:05 PM
हफ्ते में 90 घंटे काम करने को लेकर बहस के बीच विप्रो के बॉस ने कहा, मुझे वर्क-लाइफ बैलेंस में अटूट भरोसा
रिशद प्रेमजी का कहना था कि वर्क-लाइफ बैलेंस ऐसी चीज है, जिसे कोई शख्स खुद अपने लिए तय करता है।

विप्रो के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन रिशद प्रेमजी का कहना है कि उनका वर्क-लाइफ बैलेंस में अटूट भरोसा है। काम के घंटे को लेकर को चल रही हालिया बहस के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने यह बात कही। प्रेमजी ने 23 जनवरी को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, दावोस में कहा, 'आप जो संतुलन चाहते हैं, उसका मतलब काम करना और उसके बाद अपना दिमाग ठंडा करना है, न कि 10/20/30 या 70 घंटे गिनना। बहरहाल, मेरा वर्क-लाइफ बैलेंस में अटूट भरोसा है।'

इंफोसिस के फाउंडर नारायण मूर्ति द्वारा 70 घंटे प्रति सप्ताह काम करने को लेकर दिए गए बयान के बाद हाल में लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के चेयरमैन एसएन सुब्रमण्यन ने हाल में 90 घंटे प्रति हफ्ते काम करने का सुझाव दिया था, जिसको लेकर उन्हें खासी आलोचना झेलनी पड़ी थी। सुब्रमण्यन ने कहा था, ‘आप कितनी देर तक अपनी पत्नी को निहार सकते हैं? पत्नियां कितनी देर तक अपनी पति का चेहरा देखती रहेंगी?’

बहरहाल, विप्रो के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन का कहना है कि हमें आराम की जरूरत और इसके बाद फिर से तरोताजा होकर काम पर पहुंचने की ताकत को कम करके नहीं आंकना चाहिए। प्रेमजी ने कहा, ‘वर्क-लाइफ बैलेंस ऐसी चीज है, जिसे कोई शख्स खुद अपने लिए तय करता है। मुझे लगता है कि आपको बेहतर तरीके से काम करने की जरूरत होती है और इसके लिए आराम भी जरूरी है।’ उनका यह भी कहना था कि वर्क-लाइफ बैलेंस की परिभाषा तय करना नितांत निजी मसला है। उन्होंने कहा, ‘मैं पहले भी इस बारे में बात कर चुका हूं। यह घंटे और इस बात का मामला है कि किस तरह का संतुलन आप चाहते हैं।’

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