लक्षद्वीप भारत का केंद्र शासित प्रदेश है। देश में कुल 8 केंद्र शासित् प्रदेश हैं। जिनमें दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी समेत कई राज्य हैं। इस बीच इन दिनों लक्षद्वीप सुर्खियों में बना हुआ है। कहा जा रहा है कि लक्षद्वीप में एक भी सांप और कुत्ते नहीं पाए जाते हैं। यह एक छोटा और खूबसूरत द्वीपसमूह है। यहां जगह और संसाधन सीमित हैं। ऐसे में इस राज्य में कुत्ते पालने की परंपरा कभी विकसित नहीं हुई है। लक्षद्वीप में सांप भी नहीं पाया जाता है। जबकि केरल में सबसे ज्यादा सांप पाए जाते हैं। केरल को सांपों का घर भी कहा जाता है।
लक्षद्वीप एक केंद्र शासित प्रदेश है। यह 36 छोटे-छोटे आइलैंड से मिलकर बना है। लक्षद्वीप की कुल आबादी करीब 64000 है। कुल 32 वर्ग किलोमीटर में फैले लक्षद्वीप की 96 फीसदी आबादी मुसलमान है। बाकी यहां हिंदू, बौद्ध और दूसरे धर्मों के लोग रहते हैं।
लक्षद्वीप है रेबीज फ्री स्टेट
लक्षद्वीप एक रेबीज फ्री स्टेट है। इस केंद्रशासित प्रदेश में कुत्ते नहीं पाए जाते हैं। इसके अलावा घूमने जाने वाले पर्यटकों को भी कुत्तों को लेकर जाने की इजाजत नहीं है। सरकार ने पालतू और गैर-पालतू सभी तरह के कुत्तों को लक्षद्वीप में लेकर जाने पर रोक लगाई है। हालांकि लक्षद्वीप में बिल्लियां और चूहे बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। यहां पर सभी गलियों और रिसॉर्ट के आस-पास आपको बिल्ली और चूहे नजर आ जाएंगे। यहां के लोगों की धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के कारण कुत्तों को पालना या रखना आम नहीं है। समुद्र से घिरे होने की वजह से द्वीप पर कुत्तों के लिए अनुकूल वातावरण और भोजन की उपलब्धता बहुत कम रहती है। वहीं ये भी माना जाता है कि कुत्ते गंदगी फैला सकते हैं। इससे बीमारियां फैलती है। लिहाजा यहां के लोग कुत्ता पालने से बचते हैं।
लक्षद्वीप में नहीं हैं एक भी सांप
लक्षद्वीप में सांप भी नहीं पाए जाते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पाए जाने वाले सांपों में सिर्फ 17 फीसदी ऐसे हैं, जो जहरीले या विषैले होते हैं। बाकी सांप जहरीले नहीं होते हैं। लक्षद्वीप देश का इकलौता राज्य है, जहां सांप नहीं पाए जाते हैं। Flora and Fauna of Lakshadweep के मुताबिक, लक्षद्वीप एक स्नेक फ्री स्टेट है।
मछलियों की 600 से ज्यादा प्रजाति
लक्षद्वीप में मछलियां बहुत ज्यादा संख्या में पाई जाती हैं। यहां पर आपको अलग-अलग प्रजाति की मछलियां दिखेगी। जानकारी के मुताबिक लक्षद्वीप में करीब 600 से ज्यादा प्रजातियों की मछलियां पाई जाती हैं। वहीं खानपान से लेकर रहन-सहन और संस्कृति के मामले में कई मायनों में भारत के दूसरे राज्यों से यह अलग है।