रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की तरफ से डेवलप किया जा रहा एटापास ड्रोन रविवार को कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले के पास एक गांव में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। कथित तौर पर तापस ड्रोन एक परीक्षण उड़ान पर था जब वह हिरियूर तालुक के वड्डिकेरे गांव के बाहर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। समाचार एजेंसी एएनआई ने रक्षा अधिकारियों के हवाले से कहा कि डीआरडीओ रक्षा मंत्रालय को दुर्घटना के बारे में जानकारी दे रहा है और दुर्घटना के पीछे के विशिष्ट कारणों की जांच की जा रही है।
ड्रोन के बारे में ज्यादा डिटेल
डीआरडीओ (DRDO) की वेबसाइट के अनुसार, TAPAS-BH एक MALE UAV एक मीडियम ऊंचाई वाला लंबा एंड्यूरेंस मानव रहित हवाई वाहन है। यह ड्रोन मैक्सिमम 30,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। जो EO (इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल) और SAR (सिंथेटिक एपर्चर रडार) पेलोड के साथ 250 किमी की रेंज के साथ 24 घंटे की उड़ान क्षमता है। वेबसाइट पर लिखा है कि यह अधिकतम 350 किलोग्राम तक विभिन्न प्रकार के पेलोड ले जा सकता है।
स्वदेशी तकनीकी से बनाया गया था यह ड्रोन
पूरी तरह से स्वदेशी तकनीकि पर आधारित इस तपस यूएवी ड्रोन का निर्माण DRDO ने किया था। इसे इस साल बेंगलुरु में हुए एयरो इंडिया शो के दौरान भी प्रदर्शित किया गया था। पीएम मोदी खुद भी इस ड्रोन की तारीफ कर चुके हैं। भारतीय टेक्नोलॉजी पर आधारित तपस मेल कटेगरी का ड्रोन माना जाता है। इस ड्रोन को विकसित करने के पीछे का मकसद यह है कि किसी भी संघर्ष की स्थिति में विरोधी को पछाड़ने के लिए भारत के पास अपना खुद का ड्रोन होना चाहिए। तपस का पूरा नाम टेक्टिकल एयरबॉर्न प्लेटफॉर्म फॉर एरियल सर्विलांस है। तपस ड्रोन का इस्तेमाल सीमाओं पर निगरानी करने के अलावा दुश्मनों पर हमला करने के लिए भी किया जा सकता है। यह ड्रोन 18 घंटे से भी ज्यादा समय तक 28 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। तपस एक मीडियम एल्टीट्यूट लॉन्ग-इंड्यूरेंस ड्रोन है।