Ankita Murder Case: झारखंड के दुमका की छात्रा अंकिता सिंह हत्याकांड मामले में मुख्य आरोपी शाहरुख और उसके दोस्त नईम उर्फ छोटू पर पॉस्को एक्ट की धाराएं लगा दी गई हैं। दुमका पुलिस ने गुरुवार को बताया कि छात्रा की मौत मामले में पॉक्सो एक्ट की धाराएं जोड़ी गई हैं। इससे पहले पुलिस द्वारा दर्ज बयान में मृतका की उम्र 19 साल बताई गई थी, जिसे बाद में सुधार कर 15 साल किया गया।
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, बाल कल्याण समिति (CWC) ने मामले में दुमका के एसपी को पॉक्सो एक्ट के तहत धाराएं जोड़ने की सिफारिश की थी। समिति ने अपनी जांच में पाया कि मृतक की उम्र 15 साल थी, न कि 19 वर्ष, जैसा कि पुलिस ने अपने दर्ज बयान में उल्लेख किया है।
अंकिता के पोस्टमार्टम के बाद बिसरा सुरक्षित रख लिया गया है, जिसकी फॉरेंसिक जांच होगी। इस बीच, अंकिता का केस अब मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) दुमका की अदालत से प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह विशेष न्यायालय प्रकाश चंद्रा की अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया है। मामले की जल्द से जल्द सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट में ट्रांसफर किया गया है।
पुलिस अधिकारी बनना चाहती थी अंकिता
झारखंड के दुमका की 12वीं कक्षा की छात्रा अंकिता सिंह (Ankita Singh) पुलिस अधिकारी बनना चाहती थी। लेकिन 23 अगस्त को शाहरुख नामक युवक ने एकतरफा प्यार में असफल होने पर 16 साल की युवती को जिंदा जला दिया जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में स्थिति तनावपूर्ण होने के बाद प्रशासन ने वहां धारा 144 लगा दी है।
दुमका के एसपी अंबर लकड़ा ने पीटीआई को बताया कि घटना में 90 फीसदी झुलस गई युवती को इलाज के लिए रांची स्थित रिम्स में भर्ती कराया गया था, जहां रविवार (28 अगस्त) तड़के ढाई बजे उसकी मौत हो गई। इस बीच एसपी ने बताया कि दुमका में स्थिति नियंत्रण में है।
आरोपी ने छात्रा को जिंदा जलाया
23 अगस्त को अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखने वाले शाहरुख ने एकतरफा प्यार में असफल होने पर पड़ोस के कारोबारी संजीव सिंह की 16 वर्षीय बेटी अंकिता पर देर रात सोते समय खिड़की से पेट्रोल उड़ेल कर आग लगा दी थी, जिसमें वह 90 प्रतिशत जल गई थी। पुलिस ने बताया कि शाहरुख पिछले कुछ समय से अंकिता को परेशान कर रहा था और जब वह प्रेम संबंध रखने को राजी नहीं हुई तो आरोपी ने धमकी दी थी कि अगर मेरा कहा नहीं मानेगी तो तुम्हें मार डालूंगा। पुलिस ने आरोपी युवक शाहरुख को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था।
अंकिता एक गर्ल्स स्कूल की छात्रा थी। वह एक पुलिस अधिकारी बनना चाहती थी। बचपन में कैंसर के कारण अपनी मां को खोने के बाद अंकिता के परिवार को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा, क्योंकि उन्हें अपनी मां के इलाज का लाभ उठाने के लिए अपनी जमीन और संपत्ति बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि उसके पिता की आय 200 रुपये प्रति दिन थी और इस दैयनीय स्थिति के कारण अंकिता ने छात्रों को ट्यूशन देना शुरू किया। उससे वह हर महीने 1,000 रुपये कमाने में सफल रही। अंकिता का परिवार दुमका में दो कमरों के घर में रहता था।
बाल कल्याण समिति (CWC) ने कहा कि छात्रा की 10वीं कक्षा के मार्कशीट के अनुसार उसकी उम्र 16 साल के आसपास थी। समिति ने कहा कि वह बालिग नहीं थी जैसा कि पुलिस ने दावा किया।
दुमका सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष अमरेंद्र कुमार ने पीटीआई से कहा कि हम सिफारिश करते हैं कि FIR में बाल यौन अपराध संरक्षण (POCSO) कानून की धाराएं भी जोड़ी जाए, क्योंकि हमारी जांच के मुताबिक लड़की नाबालिग थी।
अमरेंद्र ने कहा कि अंकिता की मार्कशीट के अनुसार उसका जन्म 26 नवंबर, 2006 को हुआ था, वह नाबालिग थी। इसलिए इस मामले में POCSO एक्ट के तहत धाराएं लागू होती हैं।