उत्तर प्रदेश के किसान अब एक हफ्ते तक दिल्ली कूच नहीं करेंगे। यह फैसला किसान नेताओं की ग्रेटर नोएडा, नोएडा और यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ हुई बैठक के बाद लिया गया है। इसके बाद नोएडा एक्सप्रेस-वे से बैरिकेडिंग हटा दी गई और आवाजाही शुरू हो गई है। किसानों ने अपनी मांगों पर फैसला लेने के लिए केंद्र सरकार को एक हफ्ते का समय दिया है। इस दौरान किसान दलित प्रेरणा स्थल पर आंदोलन करेंगे। ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर क्या कारण रहे, जिसकी वजह से किसान सड़कों पर उतर आए और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।
किसान संगठन का कहना है कि आंदोलन को फिलहाल स्थगित किया गया है। यूपी सरकार के साथ बातचीत की जाएगी। अगर बातचीत सफल नहीं हुई तो फिर से दिल्ली कूच पर निर्णय लिया जाएगा। किसान प्रतिनिधि अब राज्य सरकार से बातचीत करेंगे। इस बीच पुलिस प्रशासन ने दलित प्रेरणा स्थल के गेट नंबर-3 के सामने लगाए गए बैरीकेड को हटा दिया है। रास्ते को आम लोगों के लिए खोल दिया गया है।
आखिर सड़क पर क्यों उतरे नोएडा के किसान
दरअसल, नोएडा में किसानों के इस आंदोलन की बड़ी वजह हाई पावर कमेटी की रिपोर्ट से जुड़ी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोएडा के किसानों की मांग को पूरा करने के लिए हाईपावर कमेटी बनाई गई। इस कमेटी की रिपोर्ट से किसान नाखुख रहे। यह रिपोर्ट राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश की अध्यक्षता में बनाई गई। जिसमें मंडलायुक्त, जिलाधिकारी सदस्य थे। रिपोर्ट को बनाने से पहले करीब 5 बार किसानों के साथ बैठक की गई। साथ ही नोएडा ग्रेटर नोएडा और यमुना विकास प्राधिकरण के सीईओ का सहयोग लिया गया। इसमें किसानों की प्रमुख मांगों को दरकिनार कर दिया गया। किसानों की प्रमुख मांग 10 फीसदी विकसित लैंड और 64.7 फीसदी की दर से मुआवजा की है। हाई पावर कमेटी की सार्वजनिक हुई रिपोर्ट में इन दोनों मांग को ही खारिज कर दिया गया था। कमेटी ने दोनों ही मांग पर असहमति जताई थी।
कमेटी की रिपोर्ट पर सरकार की मुहर लगना बाकी
कमेटी की ओर से बनाई गई इस रिपोर्ट को शासन को भेज दी गई है। अब इस पर अंतिम मुहर सरकार को लगाना है। ऐसे में किसानों का साफ तौर पर कहना है कि जब तक हमारी मांगें नहीं पूरी होंगी तब तक किसान आंदोलन जारी रहेगा।
प्रेरणा स्थल पर करीब 50,000 किसान
दलित प्रेरणा स्थल करीब 50,000 किसान जुट गए थे। कई गांवों से आए किसानों के सड़क पर उतरने की स्थिति में शहर पूरी तरह से जाम से पट गया। नोएडा से दिल्ली तक इस प्रदर्शन को लेकर हलचल तेज रही। करीब 4000 पुलिसकर्मियों को सड़क पर उतार दिया गया। इस कारण किसानों को आगे बढ़ने से रोकने में सफलता मिली।