Heart Disease: भारत में दिल के मरीजों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। आजकल के युवा भी इसकी चपेट में तेजी से आ रहे हैं। इस बीच दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉ. जेपीएस साहनी ने एक स्टडी में बड़ा खुलासा किया है। इसमें कहा गया है कि काफी समय से लोगों का मानना था कि ज्यादातर भारतीयों को दिल की बीमारी इसलिए होती है क्योंकि उनकी दिल की आर्टरी छोटी होती है। इस रिसर्च के जरिए हम बताना चाहते हैं कि ऐसा कुछ नहीं है। गलत लाइफस्टाइल, एक्सरसाइज न करना के कारण ही दिल की बीमारी होने का खतरा ज्यादा होता है।
इन दिनों हार्ट अटैक और अन्य कार्डियोवैस्कुलर डिजीज के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। कम उम्र के लोग भी दिल की बीमारियों की चपेट में आकर अपनी जान गंवा रहे हैं। पहले माना जाता था कि दिल की बीमारी के शिकार सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्ग या वयस्कों को होते हैं। लेकिन अब युवाओं में दिल की बीमारी बढ़ती जा रही है।
अस्पताल के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉ. जेपीएस साहनी ने बताया कि 250 मरीजों को अपनी निगरानी में रखा गया था। इन पर स्टडी की गई। इसे जर्नल ऑफ इंडियन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी में पब्लिश किया गया है। डॉ. साहनी ने बताया कि 250 लोगों में से 51 फीसदी को हाई ब्लड प्रेशर और 18 फीसदी को डायबिटीज की बीमारी थी। वहीं 4 फीसदी धूम्रपान के आदी थे। 28 फीसदी को हाई कोलेस्ट्रॉल और फैट था। 26 फीसदी के परिवार में दिल की बीमारी की हिस्ट्री थी। ऐसी स्थिति में जाहिर है कि आप दिल की बीमारी से पीड़ित हो ही जाएंगे।
स्टडी में पता चला कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के मुकाबले पुरुषों की आर्टरी (धमनी) बड़ी होती है। लेकिन हार्ट अटैक का ज्यादातर खतरा पुरुषों को ही होता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आर्टरी छोटी है या बड़ी। भारतीयों को एथेरोस्क्लेरोसिस जैसी बीमारी इसलिए हो जाती है क्योंकि उनके हार्ट के आर्टरी में फैट जमा हो जाता है। खराब लाइफस्टाइल की वजह से ऐसा होता है।
क्या है कोरोनरी आर्टरी डिजीज?
कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) एक ऐसा हृदय रोग है। जिसमें दिल की जरूरी धमनियां डैमेज हो जाती हैं। इसकी सामान्य वजह धमनियों में फैट का जमना है। इससे ब्लड फ्लो में कमी आती है, जो सीने में दर्द से लेकर हार्ट अटैक तक का कारण बन सकता है।
दुनियाभर के एक्सपर्ट्स का ऐसा मानना है कि एशियाई लोग, खासकर भारतीयों को धमनियों का डायमीटर कम होने के चलते इनमें फैट डिपॉजिट होने का खतरा ज्यादा होता है। पर यह स्टडी साबित करती है कि भारतीय लोगों की धमनियां छोटी नहीं होती हैं। उन्हें CAD का रिस्क शरीर के सरफेस एरिया कम होने की वजह से होता है।