Independence Day 2023: श्वेत क्रांति के जनक वर्गीज कुरियन, मिल्क प्रोडक्शन में देश को बनाया नंबर वन, जानिए रोचक बातें

Independence Day: श्वेत क्रांति के जरिए दूध के उत्पादन में आश्चर्यजनक बढ़ोतरी वर्गीज कुरियन के नेतृत्व में हुई थी। उन्हें श्वेत क्रांति का जनक कहा जाता है। उनका जन्म केरल के कोझिकोड में 26 नवंबर 1921 को हुआ था। उनके जन्म दिन को नेशनल मिल्क डे के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने गुजरात को अपनी कर्मभूमि बनाया

अपडेटेड Aug 14, 2023 पर 2:48 PM
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Independence Day: दूध प्रोडक्शन के मामले में भारत पहले नंबर पर है। पूरी दुनिया का 23 फीसदी दूध उत्पादन भारत में होता है

Independence Day: किसी भी देश की सफलता और उसके विकास में बहुत से लोगों का हाथ होता है। 75 साल में अंग्रेजों की गुलामी से आजादी से लेकर अब तक देश ने बहुत तरक्की है। जो देश आजादी के वक्त खाद्यान्न संकट से जूझ रहा था वो आज दुनिया को अनाज का निर्यात करता है। हमारा देश तमाम अलग-अलग क्षेत्रों में तमाम तरह की चीजों के उत्पादन में आगे हैं। देश के अग्रणी बनने के पीछे कोई चमत्कार नहीं बल्कि उन तमाम लोगों की मेहनत जो अपनी योग्यता के बलबूते क्रांति लाए हैं। स्वतंत्रता दिवस के इस मौके पर आज हम बात कर रहे हैं 'वर्गीज कुरियन' के बारे में। इनके प्रयासों से देश में दुग्ध क्रांति हुई।

कुरियन का जन्म केरल के कोझिकोड में 26 नवंबर 1921 को हुआ था। भारत में उनके जन्मदिन को नेशनल मिल्क डे के रूप में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत साल 2014 में की गई थी। उन्होंने गुजरात को अपनी कर्मभूमि बनाया। ‘अमूल’ डॉ. वर्गीज कुरियन का सपना था जो जल्द ही क्रांति में बदल गया। इसके बाद कहा जाने लगा कि भारत में दूध की नदियां बहती हैं।

ऑपरेशन फ्लड या दुग्ध क्रांति


70 के दशक तक भारत में दूध का उत्पादन ठीक-ठाक तो था लेकिन जनसंख्या और मांग के हिसाब यह काफी कम था। इसी को देखते हुए दूध की कमी को दूर करने के लिए 13 जनवरी 1970 को भारत में 'ऑपरेशन फ्लड' की शुरुआत की गई। इसी को दुग्ध क्रांति या श्वेत क्रांति का नाम दिया गया। इसके बाद भारत में दूध के उत्पादन में भारी मात्रा में बढ़ोतरी हुई। यह वृद्धि इतने बड़े पैमाने पर हुई कि भारत दूध का उत्पादन करने के मामले में दुनिया का नंबर वन देश बन गया। कुरियन की अगुवाई में चले 'ऑपरेशन फ्लड' के बलबूते ही भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना। अगर जमीनी स्तर पर देखें तो कुरियन की ये उपलब्धि दूध का उत्पादन बढ़ाने से कहीं ज्यादा है।

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कैसे हुई अमूल की शुरुआत?

वर्गीज कुरियन ने ही अमूल की स्थापना की थी। उनका सपना था - देश को दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर करने के साथ ही किसानों की दशा सुधारना। उनका पेशेवर जीवन सहकारिता के जरिए भारतीय किसानों को सशक्त बनाने था। उन्होंने 1949 में कैरा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड (KDCMPUL) के अध्यक्ष त्रिभुवन दास पटेल के अनुरोध पर डेयरी का काम संभाला। सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर इस डेयरी की स्थापना की गई थी। डॉक्टर कुरियन KDCMPUL को कोई सरल और आसान उच्चारण वाला नाम देना चाहते थे। कर्मचारियों ने अमूल्य नाम सुझाया, जिसका मतलब अनमोल होता है। बाद में अमूल नाम दिया गया।

कुछ रोचक बातें

1 - हिन्दुस्तान में ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में अमूल को बेहतरीन दूध प्रोडक्ट्स के लिए जाना जाता है। डॉ. कुरियन को आधुनिक दुनिया में डेयरी उद्योग में क्रांतिकारी बदलाव के लिए जाना जाता है। उनके पास देश और किसानों के लिए गजब की दूरदृष्टि थी।

2 - कुरियन ने महाराष्ट्र के 60 लाख किसानों की 60,000 कॉपरेटिव सोसायटियां बनाईं। यह रोजाना 3 लाख टन दूध सप्लाई करती हैं। इसी को श्वेत क्रान्ति और ‘ओपरेशन फ़्लड’ के नाम से भी पुकारा जाता है। इस महान कार्य से जहां किसानों का भला हुआ, वहीं आम लोगों को दूध की उपलब्धि में भी सुविधा हुई।

3 - कुरियन को पद्मश्री (1965), पद्म भूषण (1966), और पद्म विभूषण (1999), रोमन मैग्सेसे पुरस्कार (1963), खाद्य पुरस्कार (1989) समेत कई पुरस्कार मिले।

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