Rice Export Ban: भारत ने लगाया गैर बासमती चावल के एक्सपोर्ट पर बैन, अमेरिका में NRIs के बीच मचा हड़कंप

Rice Export Ban: अमेरिका में अबसे भारत का एक्सपोर्ट किया गया नॉन बासमती चावल नहीं आएगा। Rabobank senior एनालिस्ट Oscar Tjakra के मुताबिक कोई और सप्लायर भारत की इस कमी को पूरी नहीं कर सकता है। अमेरिका को सबसे ज्यादा चावल वियतनाम, थाइलैंड और पाकिस्तान सप्लाई करते हैं लेकिन इनके पास भी भारत को रिप्लेस करने जितना पर्याप्त चावल नहीं है। अमेरिका में NRI थोक के भाव चावल खरीद रहे हैं।

अपडेटेड Jul 23, 2023 पर 7:35 PM
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भारत ने पिछले साल 10.3 मिलियन नॉन बासमती व्हाइट राइस एक्सपोर्ट किया था।

Rice Export Ban: भारत सरकार ने नॉन बासमती चावल के एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया है। अमेरिका में रहने वाले NRIs पर ये फैसला दुखों के पहाड़ की तरह गिरा है। अमेरिका से कई वीडियोज सोशल मीडिया पर सामने आ रहे हैं। इन वीडियोज में भारतीय ग्रोसरी स्टोर के बाहर लंबी कतारों में खड़े हुए हैं। चावल के पैकेट्स को खरीदने के लिए लोगों के बीच होड़ मच गई है। गुरुवार को भारत सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी किया। इस नोटिफिकेशन के आधार पर गैर बासमती चावलों का एक्सपोर्ट बंद कर दिया गया है। भारत पूरी दुनिया में लगभग 40 प्रतिशत चावल एक्सपोर्ट करता है। ऐसे में ये भी खबर है कि लगाए गए बैन की बदौलत अमेरिका में खाने की कीमतें बढ़ सकती हैं।

चावल खरीददारी की वीडियोज हो रही वायरल

सोशल मीडिया पर दुकानों के बाहर लंबी कतारें और स्टोर के भीतर जमा हुई भीड़ की फोटोज और वीडियोज सामने आ रही हैं। एक डिपार्टमेंटल स्टोर में तो आदमी शेल्फों को ऊपर एकदूजे पर लटककर भारी चावल के बैग उतारते हुए दिखाई दे रहे हैं। स्टोर्स के भीतर लोग एक से ज्यादा चावल के बैग खरीद रहे हैं।


चावल खरीद को लेकर लोगों के बीच कंपीटिशन

चावल के लिए बढ़ रही इस मारा-मारी के बीच चावल को ऑनलाइन ज्यादा दामों पर बेचने का खतरा भी बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर एक यूजर ने कमेंट किया कि यहां के सभी देसी स्टोर्स में से इंडियन चावल खत्म हो गया है। हर NRI फैमिली 10-15 बैग चावल के खरीद रही है क्योंकि इंडिया ने गैर बासमती चावलों के एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया है। यही वजह है कि ज्यादा IQ वाले NRIs ने 100-200 किलो प्रति परिवार बासमती चावल स्टोर कर लिया है। इनमें से कुछ तो इसे फेसबुक मार्केट प्लेस पर भी बेच रहे हैं।

सरकार देश में कम करना चाहती है चावल की कीमत

गुरुवार को फूड मिनिस्ट्री की जारी की गई स्टेटमेंट में साफ लिखा गया कि बैन के बावजूद लोगों को पर्याप्त मात्रा में चावल दिए जाएंगे। इससे डॉमेस्टिक मार्केट में बढ़े चावल के दामों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। पिछले एक साल में चावलों के रिटेल प्राइस में 11.5 प्रतिशत का उछाल देखने को मिला है। भारत से बाहर के देशों में नॉन बासमती चावलों के एक्सपोर्ट में 35 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

कई देशों पर दिखेगा चावल का असर

ये उछाल सरकार के टूटे हुए चावल के एक्सपोर्ट पर बैन लगाने के बाद भी दिखा था। सितंबर में उस दौरान व्हाइट चावल पर 20 प्रतिशत का एक्सपोर्ट टैक्स लगा दिया गया था। भले ही अमेरिका में बैन से खलबली मच गई है लेकिन अमेरिका के बाद अफ्रीकी देश, तुर्की, सीरिया और पाकिस्तान पर भी इसका असर देखने को मिलेगा। इन देशों में पहले से ही खाने की कीमतें बढ़ी हुई हैं।

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कौन करेगा भारत की कमी को पूरा?

भारत ने पिछले साल 10.3 मिलियन नॉन बासमती व्हाइट राइस एक्सपोर्ट किया था। Rabobank senior एनालिस्ट Oscar Tjakra के मुताबिक कोई और सप्लायर भारत के अलावा इस कमी को पूरी नहीं कर सकता है। अमेरिका को सबसे ज्यादा चावल वियतनाम, थाइलैंड और पाकिस्तान सप्लाई करते हैं लेकिन इनके पास भी भारत को रिप्लेस करने जितना पर्याप्त चावल नहीं है।

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