Indian Railways: ट्रेन-प्लेटफॉर्म पर आ रही बदबू टेक्नोलॉजी से होगी दूर, जानिए क्या है रेलवे का प्लान

Indian Railways: भारतीय रेलनवे दिनों दिन हाईटेक होती जा रही है। अब अगर आपको ट्रेन या प्लेटफॉर्म पर बदबू आ रही है तो रेलवे टेक्नोलॉजी के जरिए इसे पता करेगी और जल्द ही समस्या को पलक झपकते ही हल कर दिया जाएगा। रेलवे जल्द ही इसकी टेस्टिंग की तैयारी में है

अपडेटेड Apr 14, 2024 पर 2:22 PM
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Indian Railways: रेलवे अब बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए टेक्नोलॉजी का सहारा ले रहा है।

Indian Railways: भारतीय रेले की ओर से यात्रियों को कई तरह की सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। रेलवे दिनों दिन हाईटेक होता जा रहा है। अधिक से अधिक मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है। रेलवे ने ट्रेनों, स्टेशनों और अन्य कई जगहों पर अहम बदलाव किए हैं। फिर भी लोगों को ट्रेन में यात्रा करते समय कभी-कभी कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बदबूदार और गंदे टॉयलेट का इस्तेमाल लोगों को करना पड़ता है। ऐसे में इस समस्या को खत्म करने के लिए रेलवे अब नई टेक्नोलॉजी पर काम करने की तैयारी में है।

वैसे भी ट्रेनों में गंदे टॉयलेट की शिकायत मिलना आम बात हो गई हो गई है। सफर के दौरान हर यात्री को इस समस्या का सामना करना पड़ता है। रेलवे अब साफ सफाई पर खास तौर से अपना फोकस बढ़ा रहा है। अब ट्रेन और स्टेशन परिसर में आ रही बदबू से जल्द ही लोगों को छुटकारा मिल जाएगा।

रेलवे की यह टेक्नोलॉजी का बदबू का करेगी सफाया


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रेलवे बोर्ड ने IoT आधारित टेक्नोलॉजी का टेस्ट करने की तैयारी की है। इस टेक्नोलॉजी में जहां कहीं भी बदबू आ रहा है। इसमें पता चल जाएगा। यह टेक्नोलॉजी डिटेक्टरों के जरिए सूंघने का काम करेगी। वैसे भी रेल मदद ऐप पर ट्रेन और स्टेशन परिसरों पर बदबू को लेकर तमाम शिकायतें आ रही हैं। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि इस काम के लिए बोर्ड ने मुंबई की स्टार्टअप विलिसो टेक्नोलॉजीज को चुना गया है। अभी इसके लिए टेस्टिंग की जा रही है। इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कुछ कोच में किया जाएगा। इसका ट्रायल सफल होने के बाद अन्य ट्रेनों पर इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा।

जानिए यह टेक्नोलॉजी कैसे करती है काम

कहा जा रहा है कि टॉयलेट में आने वाली बदबू की पहचान के लिए सेंसर का इस्तेमाल किया जाएगा। सेंसर हवा में मौजूद वाष्पशील यौगिकों (volatile compounds) और अणुओं (molecules) की पहचान करता है। फिर इसके बाद इस डेटा को सेंट्रल हब में भेज दिया जाता है। इसके बाद हब इस डेटा का विश्लेषण करता है और फौरन जबाव देगा। यह सफाई कर्मचारी को भी बदबू के बारे में अलर्ट कर सकता है। उसे बताया जा सकता है कि यहां सफाई की जरूरत है।

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