इस शहर में भिखारियों को भीख दी तो होगी जेल, सूचना देने वाले को मिलेगा 1,000 रुपये का इनाम

Indore News: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर को भिखारियों से मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने कहा है कि पुलिस 1 जनवरी, 2025 से भीख मांगने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना शुरू कर दी है। जिला कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि प्रशासन ने इंदौर में भीख मांगने पर प्रतिबंध लगाने का आदेश पहले ही जारी कर दिया है। इस मामले में आरोपियों पर एक साल की सजा हो सकती है

अपडेटेड Jan 03, 2025 पर 5:21 PM
Indore News: मध्य प्रदेश के इंदौर में भिखारियों को भीख देने वालों पर अब FIR दर्ज होगी

Indore News: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में अब सड़कों पर भिखारियों को भीख देने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ऐसा करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा। जी हां, इंदौर को भिखारियों से मुक्त करने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए जिला प्रशासन ने लोगों को भीख देने वालों के खिलाफ FIR दर्ज करने का फैसला किया है। सड़कों पर लोगों से भीख मांगने वाले गैंग को रोकने के प्रयास में यह नीति 1 जनवरी 2025 से लागू हो गई है। इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह ने लोगों से अपील की है कि वे इस 'पाप' का हिस्सा न बनें। प्रशासन ने अब भीख देने और भिखारियों से कोई सामान खरीदने पर कानूनी रोक लगा दी है। इस प्रतिबंध के उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान किया है।

अधिकारियों ने पीटीआई को बताया कि जिलाधिकारी आशीष सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत जारी आदेश में कहा, "किसी भी प्रकार की भिक्षावृत्ति को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया जाता है। भिक्षुओं को भिक्षास्वरूप कुछ भी देना या उनसे किसी भी प्रकार का सामान खरीदना प्रतिबंधित किया जाता है।"

प्रतिबंधात्मक आदेश में कहा गया कि जो व्यक्ति भिखारियों को भिक्षास्वरूप कोई भी चीज देता या उनसे कोई सामान खरीदता पाया गया, तो उसके खिलाफ भी इस आदेश के उल्लंघन पर कानूनी कदम उठाए जाएंगे।


एक साल की हो सकती है सजा

अधिकारियों ने बताया कि आदेश के उल्लंघन पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत FIR दर्ज की जाएगी। इस कानूनी प्रावधान के तहत दोषी को एक साल तक के कारावास या 5,000 रुपये तक के जुर्माने या दोनों सजाओं से दंडित किया जा सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, प्रशासन के प्रतिबंधात्मक आदेश में भिक्षावृत्ति की सही सूचना देने वाले व्यक्ति को प्रोत्साहन राशि के रूप में 1,000 रुपये का इनाम देने की घोषणा भी की गई है।

महिला और बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी दिनेश मिश्रा ने पीटीआई को बताया कि शहर में गुजरे चार महीनों के दौरान भिक्षावृत्ति में शामिल करीब 400 लोगों को पुनर्वास के लिए एक आश्रय स्थल भेजा गया है। जबकि 64 बच्चों को बाल देखरेख संस्थान पहुंचाया गया है।

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उन्होंने कहा, "पिछले चार महीनों के दौरान हमने लोगों को भिक्षावृत्ति के खिलाफ जागरूक करने के लिए अलग-अलग अभियान चलाए। अब भीख लेने वाले और भीख देने वाले, दोनों तरह के लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।" केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने देश के 10 शहरों को भिक्षुकमुक्त बनाए जाने की पायलट प्रोजेक्ट शुरू की है जिनमें इंदौर शामिल है।

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