Injection Needle: कोरोना काल के दौरान बहुत से लोग वैक्सीनेशन के दौर से गुजरे होंगे। हर जगह वैक्सीनेशन पर जोर दिया जा रहा था। वैसे भी तबियत खराब होने पर जब डॉक्टर के पास जाते हैं तो वहां भी कभी-कभी इंजेक्शन लगाया जाता है। आपने इंजेक्शन तो देखा होगा। लेकिन क्या कभी सोचा है कि आखिर इंजेक्शन की निडल (सुई) किस धातु से बनी होती है। बहुत सी ऐसी चीजें हैं। जो हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन जाती है। हम उसके बारे में ज्यादा जानते भी नहीं है। इंजेक्शन का नाम भी लोग आमतौर पर सुनते रहते हैं।
क्या आपने कभी सोचा है कि अगर इंजेक्शन की सुई टूट जाए और शरीर के अंदर ही रह जाए तो क्या होगा? क्या यह हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है? आइए जानते हैं।
इंजेक्शन की सुई किस धातु की बनी होती है?
इंजेक्शन की सुई आमतौर पर स्टेनलेस स्टील (stainless-steel) से बनी होती है। इसे ही कार्बन स्टील भी कहा जाता है। हाइपोडर्मिक सुइयां आमतौर पर स्टेनलेस-स्टील या नाइओबियम ट्यूब से ट्यूब ड्राइंग नामक प्रक्रिया के जरिए बनाई जाती हैं। यहां सुई बनाने के लिए ट्यूब को छोटे डाई के माध्यम से खींचा जाता है। सुई के सिरे को एक नुकीला सिरा बनाने के लिए मोड़ा जाता है। जिससे सुई आसानी से त्वचा में प्रवेश कर जाती है। इंजेक्शन की सूई का मजबूत मेटल का बनाना बेहद जरूरी है। ताकि ये कभी भी टूटकर शरीर के अंदर नहीं रह जाए। ऐसा होने पर इंफेक्शन हो सकता है। इस खोखली सूई के जरिए शरीर में पिचकारी जैसी सीरिंज की सहायता से दवाई डाली जाती है। सूई लगना, इंजेक्शन लगना या फिर टीका लगना एक ही प्रक्रिया के अलग-अलग नाम हैं।
जानिए कौन सा इंजेक्शन कहां लगता है?
अब हम आपको बता रहे हैं कि कौन सा इंजेक्शन कहां लगाया जाता है। इंट्रावेनस इंजेक्शन का इस्तेमाल नसों में सीधे मेडिसिन पहुंचाने के लिए किया जाता है। टिटनेस हो या फिर कोविड वैक्सीन ये सब इंट्रावेनस इंजेक्शन ही हैं। इसीलिए इन्हें हाथ में लगाया जाता है। वहीं दूसरी ओर इंट्रामस्क्युलर इंजेक्शन को मांसपेशियों वाले हिस्से में लगाते हैं। मांसपेशियों में इंजेक्शन लगाने से दवा सीधे खून में मिल जाती है और शरीर पर तेजी से असर करती है। यही वजह है कि इस तरह के इंजेक्शन को कूल्हों पर या फिर जांघ पर लगाया जाता है। ऐसे इंजेक्शन्स में ज्यादातर एंटीबायोटिक और स्टेरॉयड शामिल होते हैं।