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XPoSat Launched: ब्लैकहोल की स्टडी के लिए ISRO ने लॉन्च किया सेटेलाइट, रॉकेट के साथ भेजे गए 10 पेलोड

ISRO ने अपने श्रीहरिकोटा सेंटर से XPoSat लॉन्च कर दी है। इस सेटेलाइट को PSLV रॉकेट से पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजा गया है। इस सेटेलाइट में दो पेलोड पोलिक्स और एक्सपेक्ट लगाए गए हैं। ये सेटेलाइट ब्लैकहोल और न्यूट्रॉन स्टार्स की स्टडी करेगा। इसरो से पहले ऐसा सेटेलाइट NASA ने 2021 में भेजा था जो ब्लैकहोल के मूवमेंट पर स्टडी करने के लिए भेजा गया था।

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 01, 2024 पर 10:47 AM
XPoSat Launched: ब्लैकहोल की स्टडी के लिए ISRO ने लॉन्च किया सेटेलाइट, रॉकेट के साथ भेजे गए 10 पेलोड
ISRO ने ब्लैक होल के स्टडी करने वाले सेटेलाइ के लॉन्च से की नए साल की शुरुआत

XPoSat यानी एक्स-रे पोलारिमीटर सेटेलाइट जिसे 1 जनवरी की सुबह 9.10 मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया है। यह खास सेटेलाइट X किरणों का डाटा कॉलेक्ट करके ब्लैक होल और न्यूट्रॉन स्टार्स की कंप्लीट स्टडी करेगी। इस सेटेलाइट को PSLV रॉकेट से पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजा गया। इस सेटेलाइट में दो पेलोड पोलिक्स और एक्सपेक्ट लगाए गए हैं। यह भारत का पहला ऐसा और NASA के बाद दूसरा इमेजिंग एक्स-रे पोलरिमेट्री एक्सप्लोरर है। NASA ने 2021 में इस मिशन को किया था। स्पेस टेक स्टार्टअप द्रुव स्पेस, बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस, TM2 स्पेस के पेलोड को भी PSLV के साथ भेजा गया है। कुल 10 पेलोड इस रॉकेट के साथ रवाना किए गए हैं।

जानिए कैसे पृथ्वी के ऊपर से करेगा स्टडी

XPoSat का अलग-अलग एस्ट्रोनॉमिकल सॉर्सेज जैसे ब्लैकहोल, न्यूट्रॉन स्टार्स, एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लियाई, पल्सर विंड नेबुला आदि से निकलने वाली रेडिएशन को स्टडी करेगा। कॉम्प्लेक्स फिजिकल प्रोसेस से ये सभी बने होते हैं और इनके एमिशन को समझना काफी चैलेंजेस से भरा है। XPoSat 1315.92 सेकंड यानी 21.93 मिनट पर सुबह 9.10 बजे के लॉन्च के बाद पृथ्वी से 650 किमी ऊपर होगा। XPoSat मिशन में दो पेलोड का इस्तेमाल किया जा रहा है - POLIX और XSPECT Polix पेलोड को रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट और यूआर राव सेटेलाइट सेंटर ने बनाया है। 8-30 keV एनर्जी रेंज में ये स्टडी करेगा। Xspect एक एक्स-रे स्पेक्ट्रोस्कोपी और टाइमिंग पेलोड है।  0.8-15keV की एक्सरे एनर्जी रेंज में ये स्टडी करेगा। keV एक्स-रे रेंज को मापने की यूनिट है जिसे किलो इलेक्ट्रॉन वोल्ट कहा जाता है।

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