DM साहब घूसखोरी में हमारी भी हिस्सेदारी बढ़ावा दीजिए, दिनभर मारपीट करने पर सिर्फ 500 रुपये मिलते हैं

Jaunpur Peon Letter: उत्तर प्रदेश के जौनपुर में एक लेटर से प्रशासन में हड़कंप मच गया। नायब तहसीलदार के एक निजी कर्मचारी के नाम से सोशल मीडिया में यह पत्र वायरल हो रहा है। इसमें घूस के पैसे में उचित हिस्सेदारी की मांग की गई है। जिलाधिकारी ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। जांच में पाया गया कि तहसील में कोई भी कर्मचारी बाहरी नहीं है और पत्र भी फर्जी है

अपडेटेड Sep 08, 2024 पर 3:03 PM
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Jaunpur Peon Letter: उत्तर प्रदेश के जौनपुर का पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इसमें घूस में मिलने वाली रकम में हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग की गई है।

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में भ्रष्टाचार का अजीबोगरीब मामला सामने आया है। जिले की शाहगंज तहसील में प्राइवेट कर्मचारी के तौर पर काम करने वाले एक शख्स ने जिला अधिकारी को एक पत्र लिखा है। इसमें घूस की जो रकम आ रही है, उसमें हिस्सादरी बढ़ाने की मांग की गई है। यह पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इसके बाद जिले के पूरे प्रशासन में हड़कंप मच गया। प्रशासन की जब किरकिरी होने लगी तो SDM साहब जांच - पड़ताल में जुट गए।

पत्र में शिकायतकर्ता ने गुहार लगाते हुए दावा किया है कि वो नायब तहसीलदार के ऑफिस में प्राइवेट कर्मचारी है। सुबह से शाम तक जो लोग कार्यालय में आते हैं उन सभी से घूस ली जाती है।

घूसखोरी में सिर्फ 500 रुपये मिलते हैं


पत्र लिखने वाले शख्स ने खुद को जौनपुर जिले की शाहगंज तहसील का चपरासी बताया है। इसमें लिखा गया है कि “प्रार्थी राजाराम यादव नायब तहसीलदार लपरी शाहगंज शैलेंद्र कुमार सरोज का प्राइवेट चपरासी हूं। सारा घूस का पैसा हम ही अधिवक्ताओं और जनता से वसूलते हैं। मेरे नीचे अविनाश यादव और अजीत यादव हैं। हम लोग लगातार झगड़ा कर, मारपीट कर घूस का पैसा वसूलते हैं। दिन भर वसूले गए नायब साहब तक पहुंचा दिया जाता है। इसके बाद दिन भर की रिश्वत का बंटवारा होता है। इस दौरान सभी प्राइवेट चपरासी को 1000 रुपये रोजाना मिलते हैं। मुझे सिर्फ 500 रुपये ही नायब तहसीलदार देते हैं। मेरा पैसा बढ़ाया जाए। पत्र मिलते ही डीएम एक्‍शन में आ गए। उन्होंने एसडीएम शाहगंज को नियमानुसार जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिए हैं। इसके बाद एसडीएम शाहगंज ने 5 सितंबर को मामले की जांच कर नायब तहसीलदार से इस मामले में रिपोर्ट मांगी है।

वायरल लेटर.

प्रशासन ने कहा पत्र फर्जी है

झटपट इस मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी गई है। इसमें कहा गया है कि तहसील में कोई भी कर्मचारी बाहरी नहीं है। पत्र भी फर्जी ही है। वहीं, दूसरे दिन जिलाधिकारी के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी भी जांच के लिए तहसील पहुंच गए और उन्होंने भी स्पष्ट कर दिया कि कोई बाहरी कर्मचारी तहसील में नहीं मिला।

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