Lithium: जम्मू-कश्मीर में मिला लिथियम का भंडार भारत के लिए कैसे साबित हो सकता है गेमचेंजर? यहां जानें सबकुछ

लिथियम एक तरह का खनिज है, जिसका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक गाड़ियों, मोबाइल फोन और लैपटॉप में लगने वाली बैटरियों में किया जाता है। माना जाता है कि डीजल और पेट्रोल गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण कम करने की दिशा में ये काफी महत्वपूर्ण है। जम्मू-कश्मीर में लिथियम के 59 लाख टन के विशाल भंडार का पता चला है। लिथियम के लिए भारत अब तक ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना जैसे देशों पर निर्भर था

अपडेटेड Feb 12, 2023 पर 1:40 PM
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जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित सलाल गांव में देश का पहला लिथियम का भंडार मिला है

Lithium Mines Discovery in India: भारत सरकार ने कहा है कि उसे जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में लिथियम (Lithium) के बड़े और बेहद महत्वपूर्ण भंडार होने का पता चला है। यह देश में मिला लिथियम का पहला भंडार है। केंद्र सरकार ने हाल ही में ऐलान किया कि जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) को जम्मू-कश्मीर में लिथियम के 59 लाख टन के विशाल भंडार का पता चला है। GSI ने इलेक्ट्रिक वाहन और सोलर पैनल बनाने में अहम धातु लिथियम के 59 लाख टन भंडार का पता रियासी (Reasi) जिले में लगाया है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस खोज से उनका भविष्य उज्ज्वल होगा। बता दें कि लिथियम के लिए भारत अब तक ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना जैसे देशों पर निर्भर था।

क्या होता है लिथियम?

लिथियम एक तरह का खनिज है जिसका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक गाड़ियों, मोबाइल फोन और लैपटॉप में लगने वाली बैटरियों में किया जाता है। जानकारों का कहना है कि लिथियम का इस्तेमाल बार-बार रीचार्ज की जा सकने वाली बैटरियों में होता है। इन बैटरियों का इस्तेमाल मोबाइल फोन और लैपटॉप से लेकर इलेक्ट्रिक कारों में किया जाता है। माना जाता है कि डीजल और पेट्रोल गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण कम करने की दिशा में ये काफी महत्वपूर्ण है।


Volkswagen की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लिथियम के लिए वैश्विक बाजार तेजी से बढ़ रहा है। 2008 और 2018 के बीच शीर्ष उत्पादक देशों में वार्षिक उत्पादन 25,400 से बढ़कर 85,000 टन हो गया। लिथियम का उपयोग लैपटॉप और सेल फोन की बैटरियों के साथ-साथ ग्लास और सिरेमिक इंडस्ट्री में भी किया जाता है।

कैसी है लिथियम की क्वालिटी?

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि जम्मू कश्मीर में मिले देश के पहले भंडार के लिथियम की गुणवत्ता सर्वोत्तम है। जम्मू-कश्मीर के खनन सचिव अमित शर्मा ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया, "लिथियम दुर्लभ संसाधनों की कैटेगरी में आता है। पहले यह भारत में नहीं मिलता था, जिसकी वजह से हम इसके शत-प्रतिशत आयात पर निर्भर थे। GSI द्वारा किए गए G-3 (एडवांस) अध्ययन में पता चला है कि माता वैष्णो देवी तीर्थ की तलहटी में बसे सलाल गांव (रियासी जिले) में मौजूद लिथियम भंडार उच्च गुणवत्ता का है।"

अधिकारी ने बताया कि सामान्य कैटेगरी में लिथियम का ‘ग्रेड’ 220 पार्ट्स पर मिलियन (ppm) का होता है, जबकि जम्मू-कश्मीर में मिले भंडार का लिथियम 550 पीपीएम से अधिक ग्रेड का है। यह भंडार करीब 59 लाख टन है जो लिथियम की उपलब्धता के मामले में चीन को पीछे छोड़ देगा। उन्होंने कहा कि भारत इस खोज के साथ उन देशों के समूह में शामिल हो गया है, जिनके पास लिथियम है और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को पूरा करेगा।

शर्मा ने कहा कि लिथियम का विस्तृत इस्तेमाल है और भारत की G-20 की अध्यक्षता के समय इसकी खोज जम्मू-कश्मीर को अपने समृद्ध भंडारों को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करेगा।

कब शुरू होगा खनन?

खनन शुरू होने की समयसीमा के बारे में पूछे जाने पर खनन सचिव ने कहा कि प्रत्येक परियोजना अपना समय लेती है। उन्होंने कहा कि हमने G-3 का अध्ययन किया है, धातु का खनन शुरू करने से पहले G-2 और G-1 अध्ययन होगा।

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सलाल गांव के उप सरपंच राजेंद्र सिंह ने कहा कि यह हम सभी के लिए गौरवान्वित करने वाला क्षण है। रेल परियोजना और माता वैष्णो देवी तीर्थ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का सबसे बड़ा साधन है, लेकिन अब यह (लिथियम) परियोजना परिवर्तनकारी साबित होगी। टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रयोग को देखते हुए सरकार महत्वपूर्ण धातुओं की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में सतत प्रयास कर रही है।

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