कुंभ पर्व भारत का ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे प्राचीन मेला है। यह वैदिक ज्योतिष की गणितीय गणना के आधार पर लगता है। जिसकी अपनी अलग धार्मिक और वैज्ञानिक महत्ता है। आज का विज्ञान कहता है कि बृहस्पति को सूर्य की परिक्रमा करने में 12 साल लगते हैं। ये बाते हमारे ऋषियों को बहुत पहले से पता है कि कुंभ का समय बृहस्पति ग्रह की गति पर ही निर्भर है। इस बार महाकुंभ मेले की शुरुआत 13 जनवरी 2025 से हो रही है। इस बार मेला घूमने के लिए श्रद्धालुओं को गाइड की सुविधा भी मिलेगी। श्रद्धालुओं के लिए डिजिटल सुविधाएं भी मुहैया कराई जा रही हैं।
महाकुंभ की शुरुआत पौष पूर्णिमा स्नान के साथ होती है। यह तिथि स बार 13 जनवरी 2025 को है। वहीं, महाशिवरात्रि के दिन 26 फरवरी 2024 को अंतिम स्नान के साथ कुंभ पर्व का समापन होगा। इस तरह से महाकुंभ 45 दिन तक चलता है। पहला स्नान पौष पूर्णिमा के दिन और आखिरी शाही स्नान महाशिवरात्रि के दिन होगा। कुंभ मेले में देश क्या, विदेशों से भी लाखों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाने आते हैं।
खोने पर अपनों से मिलाएंगे वालंटियर्स
महाकुंभ में पहली बार श्रद्धालुओं के लिए डिजिटल सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। इनमें सबसे विशेष “कुंभ सहायक” एआई चैटबॉट है। इस चैटबॉट पर रास्ते, पार्किंग, रहने-खाने और ठहरने जैसे सभी सवालों के जवाब 10 से ज्यादा भाषाओं में मिलेंगे। वहीं मेला प्रशासन की ओर से खोया-पाया केंद्र की भी व्यवस्था की गई है। इसको ध्यान में रखते हुए पूरे मेले क्षेत्र को 25 सेक्टर में बांटा गया है। महाकुंभ में बड़े स्तर पर वालंटियर्स लगाए गए हैं। ये वालंटियर्स अपनों से बिछड़ने पर उन्हें अपनों तक पहुचांने का काम करेंगे।
मेला घूमने पर इन बातों का रखें ध्यान
1 – कुंभ मेले से जुड़ी हर तरह की जानकारी के लिए kumbh.gov.in की वेबसाइट पर विजिट करें। इसके अलावा मोबाइल पर ऐप भी डाउनलोड कर सकते हैं।
2 - स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए डॉक्टर की सलाह लें। अगर आपकी कोई दवाएं चल रही हैं तो उन्हें अपने साथ जरूर रखें।
3 - आसपास के अस्पतालों, भोजनालय और आपातकालीन सेवाओं आदि जैसी सुविधाओं के बारे में जागरूक रहें।
4- सभी इमरजेंसी नंबर अपने फोन पर जरूर रखें।
5 - कोई अज्ञात या संदिग्ध वस्तु की सूचना पुलिस या मेला प्रशासन को दें।