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Mahakumbh 2025: महाकुंभ मेले में ‘शाही स्नान’ बन गया ‘अमृत स्नान’, आखिर नागा साधु ही क्यों करते हैं?

Mahakumbh Mela 2025: महाकुंभ 2025 का आगाज हो चुका है। महाकुंभ का पहला अमृत स्नान आज मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर जारी है। इस दौरान 13 अखाड़ों के साधु त्रिवेणी संगम में पवित्र डुबकी लगा रहे हैं। इसके बाद आमजन स्नान करेंगे। महाकुंभ मेले का मुख्य आकर्षण शाही स्नान को ही माना जाता है। इस बार शाही स्नान को अमृत स्नान कहा गया है। आखिर ऐसा क्यों हुआ आइये जानते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 14, 2025 पर 2:30 PM
Mahakumbh 2025: महाकुंभ मेले में ‘शाही स्नान’ बन गया ‘अमृत स्नान’, आखिर नागा साधु ही क्यों करते हैं?
Mahakumbh Mela 2025: महाकुंभ के पहले शाही स्नान के लिए कुछ नियम और परंपराएं बनाई गईं हैं। इसी के तहत सभी साधु संत नागा बाबा शाही स्नान करते हैं।

कुंभ मेला सनातन धर्म के सबसे बड़े और सबसे पवित्र धार्मिक आयोजनों में से एक है। यह 12 सालों में एक बार आता है। यह सिर्फ धार्मिक आयोजन ना होकर खगोलीय.घटनाओं से जुड़ी एक चिर पुरातन परंपरा है। जिसमें ग्रहों की स्थिति का विशेष महत्व होता है। इसी आधार पर महाकुंभ मेले का आयोजन होता है। प्रयागराज महाकुंभ मेला लग चुका है। साधु-संत और श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। यह माहकुंभ 144 साल बाद आया है। इस महाकुंभ में शाही स्नान आकर्षण का केंद्र रहता है। इस बार शाही स्नान को अमृत स्नान कहा गया है। आखिर ऐसा क्यों आइये जानते हैं।

महाकुंभ में अखाड़ों के जिस स्नान को अमृत स्नान कहा जाता है। उसे पहले शाही स्नान कहा जाता था। आज भी इसे शाही स्नान के नाम से जानते हैं। इसका संबंध मराठा पेशवा से हैं। उन्होंने ही शाही स्नान और पेशवाई करने की व्यवस्था दी थी। प्राचीन काल में राजा-महाराज भी साधु-संतों के साथ भव्य जुलूस लेकर स्नान के लिए निकलते थे। इसी परंपरा ने शाही स्नान की शुरुआत की। इसके अलावा यह भी मान्यता है कि महाकुंभ का आयोजन सूर्य और गुरु जैसे ग्रहों की विशिष्ट स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाता है, इसलिए इसे "राजसी स्नान" भी कहा जाता है।

शाही स्नान का नियम

महाकुंभ में शाही स्नान के कुछ खास नियमों का पालन किया जाता है। महाकुंभ में सबसे पहले नागा साधु स्नान करते हैं। नागा साधुओं को स्नान करने की प्राथमिकता सदियों से चली आ रही है। इसके पीछे एक धार्मिक मान्यता है। इसके अलावा गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों के लिए महाकुंभ में स्नान के नियम कुछ अलग हैं। गृहस्थ लोगों नागा साधुओं बाद ही संगम में स्नान करना चाहिए। स्नान करते समय 5 डुबकी जरूर लगाएं, तभी स्नान पूरा माना जाता है। स्नान के समय साबुन या शैंपू का इस्तेमाल न करें। इसे पवित्र जल को अशुद्ध करने वाला माना जाता है।

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