Moonlighting : भारत में मूनलाइटिंग को लेकर हो रहे बवाल के बीच क्लाउड कंपनी आईबीएम (IBM) ने बुधवार को साफ कर दिया है कि यह प्रैक्टिस सही नहीं है और कंपनी अपने वर्कप्लेस पर ऐसे किसी तरह के व्यवहार को प्रोत्साहन नहीं देती है।

Moonlighting : भारत में मूनलाइटिंग को लेकर हो रहे बवाल के बीच क्लाउड कंपनी आईबीएम (IBM) ने बुधवार को साफ कर दिया है कि यह प्रैक्टिस सही नहीं है और कंपनी अपने वर्कप्लेस पर ऐसे किसी तरह के व्यवहार को प्रोत्साहन नहीं देती है।
आईबीएम इंडिया (IBM India) के मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप पटेल ने कहा, कंपनी का रुख वहीं है जो देश में पूरी इंडस्ट्री का है।
एग्रीमेंट में स्पष्ट होती हैं शर्तें
उन्होंने रिपोर्टर्स को बताया, “हमारे सभी वर्कर्स को जब नियुक्त किया जाता है तो उन्हें एक एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने होते हैं। उसमें लिखा होता है कि वे आईबीएम के लिए फुलटाइम करने जा रहे हैं। इसलिए, उनके लिए Moonlighting नैतिक रूप से सही नहीं है।”
पटेल ने कहा, अब यही हमारा रुख है और आप इंडस्ट्री की राय पहले ही सुन चुके हैं। Moonlighting से कर्मचारियों को अपने नौकरी के घंटों से इतर काम करने का मौका मिलता है।
कुछ स्टार्टअप इस प्रैक्टिस को दे रहे हैं बढ़ावा
स्विगी जैसे कुछ स्टार्टअप्स और यूनिकॉर्न ने इस प्रैक्टिस को बढ़ावा दिया है, हालांकि ज्यादातर पारम्परिक कंपनियां इसे चीटिंग बता रही हैं।
इन्फोसिस (Infosys) ने मूनलाइटिंग को लेकर अपने कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए कहा था कि ऐसी किसी काम में लिप्त होने पर उन पर “नौकरी से टर्मिनेट करने सहित अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।”
कंपनी ने इंटरनल मेमो में कहा, “कोई टू टाइमिंग नहीं, कोई मूनलाइटिंग नहीं।” कंपनी सख्ती के साथ दोहरी नौकरी का विरोध करती है।
विप्रो चेयरमैन (Wipro Chairman) अजीम प्रेमजी (Azim Premji) ने हाल में कहा ता कि रेगुलर जॉब के साथ दूसरी जॉब सीधे शब्दों में चीटिंग है।
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