Mother Milk Bank: सोना-चांदी नहीं, इस बैंक में माताएं कर रही हैं दूध का दान, नवजात बच्चों को मिल रही है नई जिंदगी

Anchal Mother Milk Bank: राजस्थान के बाड़मेर जिले में मदर मिल्क बैंक बनाया गया है। यहां माताएं नवजात बच्चों के लिए दूध का दान करती हैं। जिन नवजात बच्चों को मां का दूध नसीब नहीं होता है। उनके लिए यह मदर मिल्क सेंटर जीवन का आधार बन रहा है। अब तक 2390 नवजात बच्चों का जीवन संवर चुका है

अपडेटेड Aug 22, 2024 पर 11:21 AM
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Mother Milk Bank: रक्तदान और नेत्रदान पुण्य का काम है। उसी तरह से मां का दूध किसी जरूरतमंद बच्चे को नया जीवन देता है।

बच्चे के जन्म से ही मां के दूध की दरकार रहती है। यही उसकी जिंदगी का आधार होता है। राजस्थान के बाड़मेर जिले में मदर मिल्क बैंक बनाया गया है। यह बैंक जरूरतमंद बच्चों के लिए मां का आंचल बनकर पोषण करते हुए नया जीवन देने में अपनी भूमिका बड़ी शिद्दत से निभा रहा है। किसी कारण से मां का दूध नहीं पाने वाले बच्चों के लिए यह बैंक आज किसी ‘मां’ से कम नहीं है। इतना ही नहीं बाड़मेर के आंचल मदर मिल्क बैंक से थार के साथ अन्य जिलों के जरूरतमंद बच्चों के लिए यहां से ‘अमृत’ भेजा जाता है।

जिस तरह अंगदान और रक्तदान पुण्य का काम माना जाता है। ठीक उसी तरह ही मां का दूध किसी जरूरतमंद बच्चे को नया जीवन देता है। इसका दान भी एक महान काम है। थार की माताएं अपना दूध उन मासूमों को दे रही हैं, जिन्हें किसी कारणवश मां का दूध नहीं मिल पाता है।

2390 नवजात बच्चों को मिल रही है नई जिंदगी


अब तक करीब 3125 माताएं अपने दूध से 2390 नवजातों को नया जीवन दे चुकी हैं। आंचल मदर मिल्क बैंक के जरिए ये सब कुछ संभव हो सका है। कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जिनकी मां स्वास्थ्य कारणों से दूध नहीं पिला सकती हैं। उनके लिए यह बैंक नवजात बच्चों को नई जिंदगी दे रहा है। साल 2018 में ह बैंक शुरू हुआ था। यह अनूठा बैंक उन माताओं पर आधारित है जो समय-समय पर जिला अस्पताल आकर अपने कीमती दूध को डोनेट करती हैं। मौजूदा समय में 338 यूनिट माँ का दूध बैंक में रखा है। जिला अस्पताल में डॉ. महेंद्र चौधरी और नर्सिंग अधिकारी पुष्पा कंवर की देखरेख में आंचल मदर मिल्क बैंक की ओर से ऑपरेट किया जा रहा है।

माताओं ने 803 लीटर दूध किया डोनेट

मदर मिल्क बैंक प्रभारी और बाड़मेर जिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. महेंद्र चौधरी ने बता कि साल 2018 से अब तक 2390 बच्चों को नई जिंदगी मिल चुकी है। वहीं अब तक माताएं 803 लीटर दूध डोनेट कर चुकी हैं। चौधरी ने बताया कि बाड़मेर के अलावा जरूरत पड़ने पर अन्य अस्पतालों में भी यह दूध डोनेट किया जाता है।

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