Nipah Virus: केरल में इन दिनों एक बार फिर खतरनाक निपाह वायरस (Nipah virus) ने कहर मचाना शुरू कर दिया है। संक्रमित व्यक्तियों की संख्या 1,080 हो गई है। इनमें 327 स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हैं। इस घातक वायरस से दो लोगों की मौत भी हो चुकी है। वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए शहर में स्कूल, कॉलेज और इंस्टीट्यूट बंद कर दिए गए हैं। वायरस को फैलने से रोकने के लिए अथॉरिटी ने 100 से अधिक स्थानों को कंटेनमेंट जोन घोषित किया है। कोझिकोड जिले से शुरू हुआ निपाह वायरस का इंफेक्शन अब 30 से ज्यादा शहरों तक पहुंच चुका है।
निपाह वायरस अब तक मलेशिया, सिंगापुर, बांग्लादेश, फिलीपींस और भारत में फैल चुका है। इसकी हिस्ट्री पर नजर डालें तो यह वायरस 2018 के बाद से केरल में चौथी बार सामने आया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि क्या कोरोना की तरह ही निपाह वायरस का संक्रमण भी एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है। इससे सबसे ज्यादा खतरा किसे है?
क्या निपाह वायरस कोरोना से है ज्यादा खतरनाक?
निपाह वायरस का संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे में आसानी से पहुंच सकता है। इसलिए सोशल आइसोलेशन में रहना बेहद जरूरी है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि निपाह का संक्रमण भी कोरोना की ही तरह ही एक-दूसरे में तेजी से फैल सकता है। संक्रमित व्यक्ति के यूरीन, ब्लड या छींकते वक्त निकली बूंदों के संपर्क में आने से स्वस्थ व्यक्ति भी संक्रमित हो सकता है। यही कारण है कि केरल में जितने भी संक्रमित पाए जा रहे हैं। उनमें स्वास्थ्य देखभाल कर्मचारियों की संख्या ज्यादा है। वहीं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (Indian Council of Medical Research – ICMR) का कहना है कि निपाह वायरस से संक्रमित लोगों में मृत्यु दर कोविड-19 महामारी के मुकाबले ज्यादा है। जहां कोविड की मृत्यु दर 2-3 फीसदी थी। वहीं निपाह की मृत्यु दर 40 से 70 फीसदी है।
निपाह वायरस एक वायरल संक्रमण है और 'निपाह' नाम मलेशिया के एक गांव से आया है। जहां इसका पहला प्रकोप 1998-1999 में सामने आया था। इसकी मृत्यु दर काफी अधिक है। यह एक जूनेटिक वायरस है जो मनुष्यों में गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। यह मुख्य रूप से जानवरों से मनुष्यों में फैलता है और मानव से मानव में भी फैल सकता है। निपाह वायरस संक्रमण के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं।
निपाह वायरस से संक्रमित व्यक्ति में फीवर, तेज सिर दर्द, सांस लेने में परेशानी, खांसी, गला खराब, उल्टी-दस्त, मांसपेशियों में दर्द, शरीर में कमजोर जैसे प्रमुख लक्षण पाए जाते हैं। निपाह वायरस जब शरीर पर अपना असर दिखाने लगता है तो बुखार उतरने का नाम नहीं लेता है। गला खराब हो जाता है। मरीज को उल्टी और दस्त की शिकायत हो सकती है। मरीज को बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होती है। इसके साथ उसके मांसपेशियों में दर्द बना रहता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, निपाह वायरस से बचने के लिए किसी भी तरह की दवा-वैक्सीन अभी मार्केट में मौजूद नहीं है। निपाह वायरस से बचने के लिए जैसे ही शुरुआती लक्षण दिखें तो फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इस वायरस को रोकने का एक मात्र तरीका जागरूकता फैलाना है। फलों को अच्छी तरह धोकर सेवन करना चाहिए।