अगर आप राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा (Noida) में फ्लैट खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो सबसे पहले आप बिल्डर के बारे में अच्छी तरह से जांच पड़ताल कर लें, नहीं तो आप धोखाधड़ी के शिकार हो सकते हैं। इतना ही नहीं आप फ्लैट बुक करने से पहले बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन साइट पर खुद जाकर जांच कर लें कि आखिर आप जिस फ्लोर पर घर खरीद रहे हैं क्या उसे उतनी ऊंची इमारत बनाने की इजाजत मिली है या नहीं? जी हां, दरअसल ऐसा ही एक फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक बिल्डर को सिर्फ 9 फ्लोर तक नोएडा अथॉरिटी से बनाने की इजाजत मिली थी, लेकिन उसने धोखाधड़ी कर बायर्स को 16वीं मंजिल का फ्लेट बेच दिया।
फर्जीवाड़ा करने का आरोप नोएडा के लॉजिक्स इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड (Logix Builder) पर लगा है। कंपनी ने बायर्स को नोएडा के सेक्टर-143 में स्थित लॉजिक्स ग्रीन ब्लास्म में U- टावर के 16वें फ्लोर पर 1,606 नंबर का एक फ्लैट बेच दिया। आपको जानकर हैरानी होगी कि नोएडा अथॉरिटी ने इस प्रोजेक्ट को सिर्फ ग्राउंड के साथ 9 फ्लोर तक बनाने की इजाजत दी थी। कोर्ट के आदेश पर लॉजिक्स इंफ्राटेक के मालिक शक्ति नाथ, उनकी पत्नी मीना नाथ, बेटे विक्रम नाथ, करण इसरानी, मुकेश मोहन श्रीवास्तव एवं देवेंद्र मोहन सक्सेना को ठग करार देते हुए कोतवाली सेक्टर-20 में मुकदमा दर्ज किया गया है।
पीड़िता की कहानी, उसी की जुबानी
पीड़ित फ्लैट बायर्स के वकील भूपेंद्र सिंह ने एक दैनिक अखबार को बताया कि नोएडा सेक्टर-27 के रहने वाले आकाश सिंह ने साल 2014 में लॉजिक्स इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के ब्लॉसम ग्रीन प्रोजेक्ट में 16वें फ्लोर पर 990 वर्गफीट एरिया का एक फ्लैट बुक किया। फ्लैट की कीमत उस वक्त 40.59 लाख रुपये बताई गई थी। आकाश ने दो बार में 24.81 लाख रुपये बिल्डर के बैंक अकाउंट में जमा कर दिए। बिल्डर को 2018 में घर देना था। लेकिन डेट निकलने के बाद जब घर नहीं मिला तो आकाश ने नोएडा अथॉरिटी से इसकी शिकायत की।
इस दौरान पीड़ित को पता चला कि इस प्रोजेक्ट के लिए नोएडा अथॉरिटी ने केवल 9 फ्लोर की बिल्डिंग बनाने की अनुमति दी दी। यह जानकारी मिलते ही शख्स के होश उड़ गए और वह अब अपने पैसे के लिए बिल्डर के ऑफिस से लेकर कोर्ट का चक्कर लगा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित ने जब बिल्डर से अपना पैसा मांगा तो उसके साथ मारपीट की गई। इतना ही नहीं जब वह अपनी शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंचा तो वहां भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिसके बाद उसने कोर्ट में एक याचिका दायर कर इंसाफ की गुहार लगाई है।