आठ महीने की मेहनत और लगभग 800 करोड़ का प्रोजेक्ट ट्विन टावर (Noida Supertech Twin Towers) को गिराने का ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस काम में लगे एडिफिस इंजीनियरिंग के कर्मचारियों ने भी ऑपरेशन के बाद राहत की सांस ली। नोएडा के सेक्टर 93ए में बनी सुपरटेक की ट्वीन टावर धुएं के गुबार में धवस्त हो गई है।
वरिष्ठ अधिकारी स्पेशल कमांड सेंटर से पल पल की निगरानी कर रहे थे। ढाई बजते ही एक धमाके के साथ ट्विन टावर को सिर्फ 9 सेकंड में जमीदोंज कर दिया गया। सालों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद रविवार को ट्विन टावर मलबे में बदल गए। इमारत गिराने के काम में एडिफिस इंजीनियरिंग को लगाया गया था। विवादित ट्विन टावर को गिरा दिया गया है। नोएडा प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी इस मौके पर मौजूद थे।
ट्विन टावर के पास ही एक स्पेशल कमांड सेंटर भी बनाया गया जहां गौतमबुद्ध नगर के पुलिस कमिश्नर और कलेक्टर सहित तमाम बड़े अधिकारी पल पल की गतिविधि पर नजर रखे हुए थे। पूरे ऑपरेशन के लिए 7 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए। ड्रोन कैमरे से भी हर गतिविधि पर नजर रखी गई ताकि कोई अनहोनी ना हो।
इस ऐतिहासिक लम्हे को सैकड़ों लोगों ने मोबाइल में और मीडियाकर्मियों ने अपने कैमरे में कैद किया। बिल्डिंग ध्वस्त होते ही चारों ओर धूल का गुबार बन गया और ट्विन टावर मलबे में तब्दील हो गई। ये धूल का गुबार अगले तीन से चार दिनों तक लोगों को परेशान कर सकता है। इससे बचने के लिए बच्चों और बुजुर्गो को मास्क लगाने की जरूरत पड़ेगी।
सुपरटेक ट्विन टावर्स के आसपास सफाई का काम शुरू हो चुका है। बताया जा रहा है कि धमाके से आसपास की सोसाइटियों के कई घरों की खिड़कियों के शीशे टूट गए। 10 किलोमीटर तक ब्लास्ट की आवाज सुनाई दी। न्यूज 18 के मुताबिक, कुछ घरों की टाइल्स भी टूट गई है। इमारत को जब गिराया गया तो लोगों के घरों में लगे पंखे हिलने लगे।
नोएडा ऑथॉरिटी की सीईओ रितु माहेश्वरी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, "सारा मलबा साइट के अंदर ही है। थोड़ा मलबा रोड पर आया है। साइट का निरिक्षण किया जा रहा है। धूल तुरंत हट गई थी। थोड़ी देर में सफाई का काम शुरू होगा। गैस और बिजली की सप्लाई दोबारा शुरू करा कर लोगों को 6.30 बजे के बाद अपने घरों में आने की इजाजत होगी।"
उन्होंने कहा कि आस-पास की हाउसिंग सोसाइटियों को कोई नुकसान नहीं हुआ है। अभी कुछ मलबा सड़क की तरफ आया है। हमें एक घंटे में स्थिति का बेहतर अंदाजा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि बस एक बटन दबाते ही एक मिनट के अंदर पूरी बिल्डिंग धराशायी हो गई।
उन्होंने बताया कि 9000 से ज्यादा छेद कर 3700 किलो बारूद भर इस टावर को ध्वस्त किया गया। बिल्डिंग गिरने के बाद तीन किलोमीटर इलाके तक धूल फैलती दिखी। प्रदूषण पर काबू पाने के लिए एंटी फगिंग गन और 75 वाटर टैंक तैनात किए गए थे।