कोरोना वायरस महामारी है कि खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। इसके नए – नए वेरिएंट फिर उसके सब वेरिएंट पूरी दुनिया में तबाही मचाए हुए हैं। कोरोना वायरस के वेरिएंट ओमीक्रोन के सब वेरिएंट BA.4 और BA.5 का खतरा देश में बढ़ता जा रहा है। अब यह सिर्फ सर्दी, खांसी, जुकाम तह की सीमित नहीं रह गया है। इसके कई अजीब लक्षण सामने आए हैं, जो कई हफ्तों, महीनों तक बने रहते हैं। जिससे शरीर के कई अंगों पर भारी नुकसान झेलना पड़ता है।
बता दें कि इन दिनों कोरोना वायरस के साथ में मंकीपॉक्स, मलेरिया, डेंगू, जैसी अन्य घातक बीमारियों का प्रकोप बना हुआ है। मंकीपॉक्स तो दुनिया के 23 देशों में आतंक मचाते हुए आगे बढ़ रहा है। इन सभी के लक्षण एक दूसरे से काफी मिलते-जुलते हैं। लिहाजा सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
कोरोना के मौजूदा स्थिति में अगर आपको बुखार-खांसी से हटकर कुछ अलग लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो बिना किसी देरी के तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोरोना के चपेट में आ चुके कई लोगों में महीनों बाद त्वचा से जुड़ी समस्याएं सामने आई हैं। इसमें त्वचा में दाने, त्वचा का फटना जैसे लक्षण नजर आए हैं। इतना ही नहीं त्वचा पर पित्ती दिख सकती है। हाथ-पैर की उंगलियों का रंग बदल सकता है। इसके अलावा कोरोना से संबंधित त्वचा की समस्या हाथों, कलाई और टखनों को भी प्रभावित कर सकती है। जानकारों का मानना है कि ऐसे लक्षण 2-3 हफ्ते तक रहते हैं।
कोरोना संक्रमण के बाद अगर मरीज को अक्सर भ्रम और बेचैनी हो रही है तो इसे अनदेखा बिल्कुल भी न करें। यह इस बात का संकेत हो सकता है कि आपको लंबे समय तक रहने वाले कोरोना के लक्षण हैं। ब्रेन फॉग, याददाश्त कमजोर होना, भ्रम, बोलते समय शब्दों का लड़खड़ाना और मानसिक थकान कोरोना से जुड़े कुछ ऐसे लक्षण हैं जो आमतौर पर नहीं देखे जाते हैं। लेकिन ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं।
लंबे समय तक चलने वाले लक्षणों में गले से जुड़े समस्याएं भी शामिल हैं। इससे मरीज की आवाज में बदलाव आ सकता है। आवाज से जुड़ी समस्याओं को ठीक होने में 6-8 हफ्ते लग सकते हैं। कोरोना की वजह से व्यक्ति को बहुत अधिक खांसी होने की संभावना होती है। लगातार खांसने से वोकल कॉर्ड पर असर पड़ता है और इस वजह से उनमें सूजन आ सकती है। बाद में वोकल कॉर्ड सख्त और कम लचीले हो जाते हैं। इसलिए आवाज की समस्या पैदा हो सकती है।
आंख का लाल या गुलाबी होना
पिंक आई या कंजंक्टिवाइटिस भी कोरोना से जुड़ा है। सामय तौर पर यह समस्या 7-10 दिन तक रहती है। लेकिन कोरोना के मामले में कई हफ्तों तक बना रहता है। एक स्टडी में कहा गया है कि कोरोना से पीड़ित 216 बच्चों में से, 23 फीसदी में पिंक आई के लक्षण दिखाई दिए। हालांकि यह लक्षण आमतौर पर वयस्कों में नहीं देखा गया था।