कोरोना संक्रमित मरीजों की तादाद भारत में बेहद कम हो गई है। देश में कई गतिविधियां प्री कोविड लेवल पर पहुंचने लगी हैं। इस बीच पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के XE वेरिएंट ने एक नई टेंशन बढ़ा दी है। यूरोप, एशिया के कुछ देशों में कोरोना वायरस महामारी के चलते अभी भी हालात बेहद खराब चल रहे हैं। चीन, साउथ कोरिया में ओमीक्रोन के नए वेरिएंट से हाहाकार मचा हुआ है। ऐसे में कोरोना वायरस के XE वेरिएंट कितना खतरनाक है, यह जानना बेहद जरूरी हो गया है।
वेल्लोर (Vellore) के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (Christian Medical College) की प्रोफेसर डॉ गगनदीप कांग (Dr Gagandeep Kang) ने कहा कि कोरोनवायरस का नया XE वेरिएंट गंभीर चिंता का विषय नहीं है, क्योंकि यह ओमीक्रोन और इसके सब-वेरिएंट्स से अधिक गंभीर होने के आसार नहीं हैं। कांग ने कहा कि लोग यात्रा करते रहते हैं, ऐसे में वेरिएंट आ सकते हैं। फिलहाल XE वेरिएंट चिता का विषय नहीं है।
वैक्सीनेशन होने पर XE वेरिएंट से न हो परेशान
कांग ने अपने बयान में कहा है कि हम ओमीक्रोन के वेरिएंट BA.2 को लेकर काफी चिंतित थे, लेकिन यह BA.1 से ज्यादा गंभीर नहीं हुआ। XE वेरिएंट BA.1 या BA.2 से ज्यादा गंभीर नहीं है। वैसे भी जिन इलाकों में वैक्सीनेशन हो चुका है। वहां XE वेरिएंट से ज्यादा परेशान होने की बात नहीं है। वहीं अन्य हेल्थ एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि XE वेरिएंट को लेकर ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है। दरअसल नए वेरिएंट को लेकर शुरुआती आंकड़ों के आधार पर कहा जा रहा है कि यह दूसरे वेरिएंट के मुकाबले 10 गुना ज्यादा तेजी से फैलता है।
रीकॉम्बिनेंट कम समय तक टिकता है
वहीं इस पूरे मामले में इंडियन मेडिकल काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (Indian Council of Medical Research -ICMR) के डॉ. रमन गंगाखेड़ेकर (Dr Raman Gangakhedekar) ने कहा है कि जब कोई रीकॉम्बिनेंट होता है तो यह बेहद कम समय तक टिकता है। उन्होंने आगे कहा कि कोई रीकॉम्बिनेंट तब तैयार होता है, जब कोई व्यक्ति दो अलग-अलग प्रकार के वायरस से संक्रमित हो जाता है। ऐसे में रीकॉम्बिनेंट म्यूटेशन सामने आता है।
XE वेरिएंट के बारे में पहली बार जनवरी में ब्रिटेन में पता चला। यह ओमीक्रोन BA.1 और BA.2 से मिलकर बना है। WHO के मुताबिक, अब तक कोविड के तीन हाइब्रिड या रिकॉम्बिनेंट स्ट्रेन का पता चला है, जिसमें से पहला- XD, दूसरा- XF और तीसरा- XE है। इनमें से पहले और दूसरे वेरिएंट डेल्टा और ओमीक्रोन के कॉम्बिनेशन से पैदा हुए हैं, जबकि तीसरा ओमीक्रोन सब वेरिएंट का हाइब्रिड स्ट्रेन है।
XE variant ओमीक्रोन के दो वेरिएंट से मिलकर बना है तो ऐसे में माना जा रहा है कि इसके लक्षण भी ओमीक्रोन वेरिएंट से मिलते-जुलते हो सकते हैं। XE वेरिएंट में थकान, चक्कर आना, सिर दर्द, गले में खराश, बुखार, बदन दर्द, नाक बहना और डायरिया के लक्षण महसूस हो सकते हैं। इसके अलावा XE से संक्रमित मरीजों को भी कोरोना की तरह सूंघने और स्वाद में कमी महसूस हो सकती है।
कितना खतरनाक है XE वेरिएंट
अभी तक ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं, जो यह बताते हों कि XE वेरिएंट ओमीक्रोन के अन्य वेरिएंट से अलग है। तीन महीने पहले मिले इस वेरिएंट से अभी तक कोई बड़ा खतरा सामने नहीं आया है। XE वेरिएंट अभी तक चिंता का विषय नहीं है।