Paper Bag Day 2023: कुछ साल पहले तक किराने की दुकानों से लेकर रिटेल कारोबारी तक हर जगह प्लास्टिक की थैलियों का इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन अब लोगों के प्रति काफी जागरूकता बढ़ी है। पूरी दुनिया में हर साल पेपर बैग डे (Paper Bag Day) 12 जुलाई को मनाया जाता है। आज के समय में लोग प्लास्टिक का ज्यादा इस्तेमाल करने लगे हैं। यह पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक है। इस दिन को मनाने का मुख्य मकसद पेपर बैग को बढ़ावा देना है। ताकि प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल कम किया जा सके।
वैसे भी पिछले कई सालों से प्लास्टिक बैग के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए कई बड़े आंदोलन किए गए हैं। इससे काफी जागरूकता फैली है। प्लास्टिक बैग को नष्ट करने में कई साल लग जाते हैं। इससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति भी कम हो जाती है। इनता ही नही प्लास्टिक बैग से जानवरों को भारी नुकसान होता है।
पेपर बैग का इतिहास 19वीं शताब्दी में ही मिल जाता है। फ्रांसिस वोले (Francis Wolle) ने सन 1852 में पहली बार पेपर बैग मशीन (paper bag machine) बनाई थी। फ्रांसिस के इस अविष्कार से पेपर बनाने का रास्ता खुल गया। इसके बाद सन 1871 में, मार्गरेट ई. नाइट ने फ्लैट-बॉटम पेपर बैग बनाने के लिए एक और मशीन बनाई थी। उस समय इसका नाम किराने की थैलियों के रूप में प्रचलित हुआ। इन पेपर बैग का इस्तेमाल बड़ी मात्रा में किया जाने लगा। सन 1883 और 1912 में चार्ल्स स्टिलवेल और वाल्टर ड्यूबनेर ने बेहतर पेपर बैग डिजाइन किए गए।
हर साल पेपर बैग डे एक निर्धारित थीम के तहत मनाया जाता है। इस साल पेपर बैग डे की थीम है- इस बार कुछ अलग करने की ठानें। प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करें और कागज के बैग का उपयोग शुरू करें।
पेपर बैग डे का सबसे बड़ा महत्व ये है कि हरित क्रांति लाई जाए। सवच्छता पर खास तौर से ध्यान दिया जाए। इस दिन का मकसद प्लास्टिक के बजाय पेपर बैग का इस्तेमाल करने के लिए लोगों को जागरूक करना। इन दिनों लोग प्लास्टिक का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। जिससे प्रदूषण बढ़ रहा है। ऐसे में लोग कई तरह की गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं।
सबसे पहले प्लास्टिक बैग यहां हुए बंद
सैन फ्रांस्सिको (San Fransisco) में सन 1999 में प्लास्टिक की थैलियों पर पाबंदी लगा दी गई थी। यह दुनिया का पहला शहर था। जहां प्लास्टिक बैग पर पाबंदी लगाई गई थी। सैन फ्रांस्सिको में किराने की दुकानों और फार्मेसी की दुकानों में प्लास्टिक बैग के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई। इसके बाद दुनिया के कई देशों में प्लास्टिक बैग के इस्तेमाल पर रोक लगाई। इससे लोग पेपर बैग की ओर फिर से फिर से लौटने लगे। अब आज की तारीख में विश्व पेपर बैग डे एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम बन गया है।