दिल्ली की हवा में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। बढ़ते प्रदूषण की एक बड़ी वजह पराली जलाना माना जा रहा है। 3 नवंबर को दिल्ली की हवा में पराली से निकलने वाले धुएं की मात्रा लगभग 44 फीसदी थी जो कि इस सीजन में सबसे ज्यादा है। 2 नवंबर के बाद से पराली जलाने की घटनाओं में अचानक से इजाफा देखने को मिला है। News 18 को दिए गए इंटरव्यू में सीनियर सइंटिस्ट ने कहा कि भौगोलिक स्थिति और मौसम के हालातों के चलते दिल्ली की हालत खराब हो रही है।
वहीं भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 10 नवंबर को दिल्ली में बूंदाबांदी होने की आशंका जाहिर की है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे दिल्ली में हालात और भी ज्यादा खराब हो सकते हैं। भले ही बारिश की वजह से प्रदूषण कम होता है पर अगर दिल्ली के कुछ ही इलाकों में बारिश होती है तो इससे सेकेंडरी एरोसोल बन जाएंगे। दिल्ली में पिछले कुछ दिनों में AQI 400 से भी ऊपर जा चुका है। अब इसके बहुत खराब से गंभीर श्रेणी में पहुंचने का अनुमान है। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान का चौथा स्टेज भी दिल्ली में लागू कर दिया गया है।
दूसरे राज्यों को भी करनी होगी कोशिश
वहीं सीनियर साइंटिस्टों के मुताबिक हवा में बढ़ता प्रदूषण केवल दिल्ली की समस्या नहीं है। इसके लिए दूसरे राज्यों को भी कोशिश करनी होगी। हर साल सितंबर और नवंबर के बीच, दिवाली के त्योहार के साथ, उत्तर भारत में किसान लाखों टन धान की पुआल में आग लगा देते हैं, जिससे दिल्ली की हवा जहरीली हो जाती है। लौटते मानसून के बीच, उत्तर-पश्चिमी हवाएं खेतों की आग से निकलने वाले धुएं के गुबार को लेकर धीरे-धीरे दिल्ली की ओर बढ़ती हैं, जहां जहरीले प्रदूषक ठंडे सर्दियों के मौसम में फंस जाते हैं, जिससे एक 'गैस चैंबर' बनता है।
पंजाब और हरियाणा से सामने आती हैं पराली जलाने की घटनाएं
जहां हरियाणा ने पराली जलाने की 38% घटनाओं पर अंकुश लगाने में कामयाबी हासिल की है, वहीं नवंबर में खेतों में आग फिर से बढ़ने से पंजाब की शुरुआती बढ़त तेजी से खत्म हो रही है। इस सीजन में आग लगने की कुल घटनाओं में जहां हरियाणा का हिस्सा केवल 5% है, वहीं पंजाब का हिस्सा 65% है। हरियाणा के 15 लाख हेक्टेयर की तुलना में पंजाब में लगभग 32 लाख हेक्टेयर में धान की खेती की जाती है, लेकिन खेत की आग के खतरे को कम करने में राज्य अभी भी अपने पड़ोसी देश से काफी पीछे है।