Jagannath Temple: क्या सच में जगन्नाथ मंदिर के खजाने की रखवाली कर रहे थे जहरीले सांप? जानें 'रत्न भंडार' में क्या-क्या मिला

Jagannath Temple in Puri: ओडिशा के पूरी स्थित विश्व प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार के आतंरिक कक्ष को रविवार, 14 जुलाई को 46 सालों बाद फिर से खोला गया। मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में हुआ था। मंदिर के खजाने के अंदर वाले कमरे को कीमती वस्तुओं की जांच के लिए खोला गया है

अपडेटेड Jul 15, 2024 पर 12:33 PM
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Jagannath Temple in Puri: श्रीजगन्नाथ मंदिर के खजाने के भीतरी कक्ष को 46 साल बाद खोला गया है

Jagannath Temple in Puri: ओडिशा के पुरी में स्थित 12वीं सदी के विश्व विख्यात जगन्नाथ मंदिर का 'रत्न भंडार' 46 साल बाद रविवार (14 जुलाई) दोपहर को फिर से खोला गया। अधिकारियों ने बताया कि आभूषणों, मूल्यवान वस्तुओं की सूची बनाने और भंडार गृह की मरम्मत करने के लिए रत्न भंडार को खोला गया है। इसके पहले 1978 में इसे खोला गया था। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा गठित समिति के सदस्यों ने दोपहर करीब 12 बजे मंदिर में प्रवेश किया और अनुष्ठान करने के बाद रत्न भंडार को दोपहर 1.28 बजे शुभ मुहूर्त पर पुनः खोला गया।

उन्होंने बताया कि रत्न भंडार की चीजों की सूची बनाने का काम रविवार को नहीं शुरू हुआ और इममें समय लगेगा। ओडिशा में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में रत्न भंडार को फिर से खोलना एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा था। भारतीय जनता पार्टी ने तत्कालीन सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (BJD) पर इसकी खोई हुई चाबियों को लेकर निशाना साधा था और लोगों से वादा किया था कि अगर वह चुनाव जीतती है तो रत्न भंडार को फिर से खोलने का प्रयास करेगी।

क्या खजाने की रखवाली कर रहे थे जहरीले सांप?


'रत्‍न भंडार' के द्वार खुलने के साथ ही भक्तों में यह जानने की इच्‍छा थी कि यहां खजाने में क्‍या-क्‍या रखा हुआ है। साथ ही लोग ये भी जानना चाहते थे कि क्या सच में खजाने की रक्षा करता कोई सांप भी है या नहीं? दरअसल, यह आशंका जताई गई थी कि खजाने के अंदर जहरीले सांप हैं। भक्तों का मानना ​​है कि वे कीमती सामान की रखवाली कर रहे हैं। इसलिए रविवार को सांप पकड़ने वालों को भी बुलाया गया था। लेकिन अधिकारियों ने कहा कि वहां कोई सांप नहीं मिला।

एक अधिकारी ने बताया कि सरकार ने रत्न भंडार में मौजूद बहुमूल्य वस्तुओं की डिजिटल सूची तैयार करने का निर्णय लिया है, जिसमें उनके वजन और निर्माण आदि का डिटेल्स दिया जाएगा। भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की प्रतिमाएं फिलहाल गुंडिचा मंदिर में हैं, जहां उन्हें 7 जुलाई को रथ यात्रा के दौरान ले जाया गया था। अगले सप्ताह बाहुदा यात्रा के दौरान उन्हें जगन्नाथ मंदिर में वापिस स्थापित किया जाएगा।

कौन-कौन थे मौजूद?

अधिकारियों ने बताया कि रत्न भंडार को खोलते समय 11 लोग मौजूद थे, जिसमें उड़ीसा हाई कोर्ट के पूर्व जज विश्वनाथ रथ, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीक्षक डीबी गड़नायक और पुरी के राजा 'गजपति महाराजा' के एक प्रतिनिधि शामिल थे। इनमें चार सेवक भी थे जिन्होंने अनुष्ठानों का ध्यान रखा। वे शाम करीब 5.20 बजे रत्न भंडार से बाहर आये, जिसमें एक आंतरिक और एक बाहरी कक्ष है।

पाधी ने कहा कि समिति ने कीमती सामान को आंतरिक कक्ष से तुरंत शिफ्ट नहीं करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, "कीमती सामान को शिफ्ट करने की प्रक्रिया तुरंत पूरी करनी होगी। यह आज संभव नहीं था। हम बहुदा यात्रा और सुन वेशा अनुष्ठान के पूरा होने के बाद आभूषणों को शिफ्ट करने की तारीख तय करेंगे।"

जस्टिस रथ ने कहा, "बाहरी कक्ष से आभूषणों को स्थानांतरित करने के बाद अस्थायी स्ट्रॉन्ग रूम को बंद कर दिया गया है और चाबियां तीन अधिकृत व्यक्तियों को दे दी गई हैं क्योंकि दैनिक उपयोग के आभूषण भी वहां हैं।"

उन्होंने कहा कि आंतरिक कक्ष के दरवाजों को सुरक्षित करने के लिए नए तालों का इस्तेमाल किया गया और चाबियां पुरी के कलेक्टर को सौंप दी गईं। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई। अधिकारियों ने बताया कि मंदिर के संरक्षक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने भी आंतरिक कक्ष की स्थिति का निरीक्षण किया।

संदूक में रखे जाएंगे कीमती सामान

रत्न भंडार में रखे गए कीमती सामान को ले जाने के लिए लकड़ी के छह संदूक मंदिर में लाए गए हैं। इन संदूकों के अंदरूनी हिस्से में पीतल लगा हुआ है। एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि सागवान की लकड़ी से बनी ये संदूकें 4.5 फुट लंबी, 2.5 फुट ऊंची और 2.5 फुट चौड़ी हैं। इन संदूकों को बनाने वाले एक कारीगर ने बताया, ''मंदिर प्रशासन ने 12 जुलाई को हमें ऐसी 15 संदूकें बनाने के लिए कहा था। 48 घंटे की मेहनत के बाद हमने 6 संदूक बनाई थीं।''

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सुबह जस्टिस रथ और पाधी ने गुंडिचा मंदिर में भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों की पूजा-अर्चना की थी और इस कार्य के सुचारु रूप से पूरा होने की कामना की थी। भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की प्रतिमाएं फिलहाल गुंडिचा मंदिर में हैं, जहां उन्हें सात जुलाई को रथ यात्रा के दौरान ले जाया गया था। अगले सप्ताह बाहुदा यात्रा के दौरान उन्हें जगन्नाथ मंदिर में वापिस स्थापित किया जाएगा।

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