लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के चेयरमैन एस एन सुब्रमण्यन के सप्ताह में 90 घंटे काम वाले बयान पर बहस छिड़ गई है। इस बहस में नए शामिल हुए शख्स बजाज ऑटो के राजीव बजाज (Rajiv Bajaj) हैं। बजाज का कहना है कि भारतीय उद्योग जगत को वर्क ऑवर्स या काम के घंटों का हिसाब रखने से दूर जाने की जरूरत है। उन्होंने इसे 'पुराना और पिछड़ा' मीट्रिक बताया। बजाज के मुताबिक, पर्याप्त काम करना मायने रखता है, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि काम के घंटों की गुणवत्ता क्या है।
10 जनवरी को CNBC-TV18 के साथ बातचीत में, राजीव बजाज ने वर्क कल्चर पर अधिक सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया और कहा कि अगर कर्मचारी के ऑफिस आने और वापस जाने में लगने वाले वक्त को शामिल कर लिया जाए, तो कर्मचारी पहले से ही आधा दिन काम कर रहे हैं, जो कि एक अच्छा आंकड़ा है। बजाज ने कहा कि कितने घंटे काम से पहले, गुणात्मक पहलुओं पर ध्यान देने की जरूरत है, न कि केवल एक डायमेंशन पर। राजीव बजाज ने एलएंडटी के चेयरमैन एसएन सुब्रह्मण्यन की टिप्पणी का उल्लेख नहीं किया।
आखिर क्या बोले हैं L&T चेयरमैन
सोशल मीडिया पर आए एक वीडियो में एलएंडटी के चेयरमैन एस एन सुब्रमण्यन यह कहते हुए दिखे हैं कि कर्मचारियों को सप्ताह में 90 घंटे काम करना चाहिए और रविवार को भी काम करने से नहीं हिचकना चाहिए। वह कहते हैं, ‘‘आप घर पर बैठकर क्या करते हैं? आप अपनी पत्नी को कितनी देर तक निहार सकते हैं? पत्नियां अपने पतियों को कितनी देर तक निहार सकती हैं? छोड़िए, यह सब। दफ्तर आइए और काम कीजिए।’’ वीडियो में उन्होंने कर्मचारियों से घर पर कम और ऑफिस में अधिक समय बिताने को कहा।
वीडियो में, एलएंडटी के मुख्य संचार अधिकारी सुमीत चटर्जी चेयरमैन से पूछते नजर आ रहे हैं, ‘‘एक शीर्ष समूह होने के बावजूद एलएंडटी के कर्मचारियों को शनिवार को काम करने के लिए क्यों कहा जाता है?’’ सुब्रमण्यन कहते हैं, ‘‘मुझे अफसोस है कि मैं आपसे रविवार को काम नहीं करवा पा रहा हूं। अगर मैं आपसे रविवार को काम करवा सकूं, तो मुझे और खुशी होगी, क्योंकि मैं रविवार को काम करता हूं।’’ सुब्रमण्यन के बयान से वर्क-लाइफ बैलेंस पर बहस फिर से छिड़ गई है। सबसे पहले इंफोसिस के को-फाउंडर एनआर नारायण मूर्ति के सप्ताह में 70 घंटे काम के सुझाव से यह बहस शुरू हुई थी।
काम के घंटे कारोबारों को पीछे रखने वाला सबसे निर्णायक कारक नहीं
यह कहते हुए कि कंपनियों को जरूरी काम पूरा करने की आवश्यकता है, राजीव बजाज ने कहा कि काम के घंटे कारोबारों को पीछे रखने वाला सबसे निर्णायक कारक नहीं हैं। बजाज के मुताबिक,, "मुझे शक है कि क्या यह कंपनियों को अच्छा प्रदर्शन करने से रोक रहा है, क्योंकि तब, अड़चन कंपनी के टॉप में होती है।" किसी भी कंपनी में सीनियर लीडरशिप की भूमिका बेहतर प्रोडक्टिविटी को सक्षम बनाने में शामिल रहती है। मेरा काम ऐसा वर्कप्लेस बनाना है, जो दूसरों के लिए अनुकूल हो।"
प्रोडक्टिविटी की बातें लीडरशिप पर होती हैं, लेकिन इंप्लीमेंटेशन जूनियर लेवल्स पर
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज व्यवसायों को एक कर्मचारी के काम के घंटों पर नजर रखने से दूर जाने की जरूरत है। इसके बजाय काम को अधिक तेजी से पूरा करने की जरूरत है। 90 घंटे काम के मुद्दे पर बजाज ने आगे कहा कि इसे कंपनियों की टॉप पोजिशंस से शुरू करें, और अगर ऐसा लगे कि यह प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट के रूप में काम करता है, तो इसे आगे लागू करें। उन्होंने कहा कि प्रोडक्टिविटी की बातें टॉप यानि लीडरशिप पर होती हैं, लेकिन इंप्लीमेंटेशन जूनियर लेवल्स पर होता है।